सॉफ्टवेयर क्या है, कितने प्रकार के होते हैं | software kya hai

सॉफ्टवेयर क्या है, कितने प्रकार के होते हैं | software kya hai

सॉफ्टवेयर क्या है, कितने प्रकार के होते हैं | software kya hai

हम बताएंगे आपको कि सॉफ्टवेयर क्या है और यह कितने प्रकार के होते हैं इन सब बातों को हम इस आर्टिकल में कवर करेंगे तो आइए जानते हैं और भी बहुत कुछ ताकि आपके नॉलेज में भी बढ़ोतरी हो।

सॉफ्टवेयर क्या है | Software Kya Hai | What is Software in Hindi

दोस्तों क्या आप जानते है सॉफ्टवेयर एक प्रकार की एप्लीकशन होती है जो दिए गए इनपुट निर्देशों , डाटा या प्रोग्राम का एक सेट होता है जिसका प्रयोग कंप्यूटर सिस्टम को संचालित करने एवं खास कामों को बाकि ना छोड़ने के लिए किया जाता है। सॉफ्टवेयर कंप्यूटर सिस्टम के हार्डवेयर का उल्टा ( विपरीत ) होता है। जो हमारे कंप्यूटर सिस्टम के जितने भी फिजिकल मटेरिअल होते है उनके बारे में हमे जानकारी देता है।

तो दोस्तों सॉफ्टवेयर शब्द सुनने में ही एक नार्मल सा वर्ड लगता है लेकिन इसका यूज़ कंप्यूटर सिस्टम या किसी भी डिवाइस पर चलने वाले ऐप या प्रोग्राम को वर्णित करने के लिए किया जाता है , सॉफ्टवेयर एक तरह से कंप्यूटर सिस्टम के लिए इलेक्ट्रोनिक डिवाइस है जो कंप्यूटर सिस्टम के प्रोग्राम सामग्री को संचालित करता है। सॉफ्टवेयर का एक सबसे बड़ा उदाहरण ये है की हार्डवेयर को हम छू सकते है या उसे पकड़ सकते है , लेकिन सॉफ्टवेयर को हम छू भी नहीं सकते क्यों की ये किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम या किसी भी अन्य डिवाइस के अंदर मौजूद होता है।

कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर, जिसे सॉफ़्टवेयर भी कहा जाता है, दिए गए इनपुट निर्देशों और दस्तावेज़ीकरण का एक सेट है जो कंप्यूटर सिस्टम को बताता है कि क्या करना है या कोई से काम को कैसे करना है। सॉफ्टवेयर में कंप्यूटर सिस्टम पर सभी अलग-अलग प्रोग्राम सम्मिलित होते हैं, जैसे एप्लिकेशन और ऑपरेटिंग सिस्टम , सिस्टम सॉफ्टवेयर एक प्रकार का कंप्यूटर प्रोग्राम है जिसे कंप्यूटर के हार्डवेयर और एप्लिकेशन प्रोग्राम को चलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते हैं | Software Kitne Prakar Ke Hote Hain

सिस्टम सॉफ्टवेयर पाँच प्रकार के होते है पर यू तो सॉफ्टवेयर बहुत प्रकार के होते है लेकिन मुख्य रूप से इन पाँच प्रकार के सॉफ्टवेयर को ज्यादा मान्यता प्राप्त है क्यों की इन पाँच सॉफ्टवेयर के बिना हमारा कंप्यूटर सिस्टम किसी काम का नहीं होता है क्यों की इन्हे सभी कंप्यूटर हार्डवेयर की प्रक्रियाओं और सभी प्रकार के कामो को कंट्रोल करने और किसी भी काम को बिना कोई रुकावट के काम करने के लिए डिजाइन किया गया है और ये हकीकत में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर मिलकर यूजर के काम को बहुत ही अच्छा रिजल्ट देते है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर पाँच प्रकार के होते है और उनकी लिस्ट

  • ऑपरेटिंग सिस्टम ( Oprating System / OS )
  • डिवाइस ड्राइवर ( Device Driver )
  • फर्मवेयर ( Firmware )
  • प्रोग्रामिंग लैंगुएज ट्रांसलेटर ( Programing Language Translater )
  • यूटिलिटीज ( Utilities )

ऑपरेटिंग सिस्टम ( Oprating System / OS )

ऑपरेटिंग सिस्टम अगर दोस्तों हमारे कंप्यूटर सिस्टम में ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल नहीं है तो हमारा कंप्यूटर सिस्टम किसी काम का नहीं है क्यों की पूरे कंप्यूटर में ऑपरेटिंग सिस्टम ही खास सॉफ्टवेयर है क्यों की जब तक हम हमारे कंप्यूटर सिस्टम में ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल नहीं करते तब तक हम अपने कंप्यूटर सिस्टम कुछ भी यूज़ नहीं कर सकते है।

आईये जानने की कोशिश करते है की कैसे ऑपरेटिंग सिस्टम हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। मान लीजिये कोई यूजर एक रिपोर्ट लिख कर के प्रिंटर से प्रिंट निकालना चाहता है इस काम को पूरा करने के लिए उसे वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर की जरुरत होती है साथ ही डाटा इनपुट कराने के लिए कीबोर्ड , माउस या और भी इनपुट डिवाइस का प्रयोग करना होता है फिर इसे अपने मॉनिटर या एलसीडी पर प्रदर्शित किया जाता है और फिर तैयार डाटा रिपोर्ट प्रिंटर को कमांड के तौर पर भेजी जाती है। अब इस काम को करने के लिए जो वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर और डाटा इनपुट कराने के लिए कीबोर्ड , माउस या और भी इनपुट डिवाइस का प्रयोग करना होता है तो इन सब को ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ काम करना होता है। जो इनपुट और आउटपुट डिवाइस , मेमोरी और प्रिंटर को कंट्रोल करता है।

डिवाइस ड्राइवर ( Device Driver )

डिवाइस ड्राइवर एक प्रकार का सिस्टम सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर सिस्टम के डिवाइस को किसी अन्य दूसरे डिवाइस से जोड़ता है। ड्राइवर के बिना ऑपरेटिंग सिस्टम डिवाइस को कोई भी काम करने की अनुमति नहीं देता है। जैसे प्रिंटर , वाई-फाई , ब्लूटूथ तथा और भी अन्य डिवाइस को कंप्यूटर सिस्टम से कनेक्ट करने के लिए ड्राइवर की जरुरत होती है।

उन डिवाइस के नाम जिन्हे ड्राइवर की जरुरत होती है :-

  • Mouse
  • Keyboard
  • Sound Card
  • Display Card
  • Network Card
  • Printer

आज कल तो आम तौर पर , ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए मार्केट में पहले से मौजूद ज्यादातर डिवाइस तो ड्राइवरों के साथ आते है और डिफ़ॉल्ट रूप से, इनपुट डिवाइस जैसे कि माउस और कीबोर्ड में उनके ड्राइवर पहले से स्थापित होंगे। उन्हें कभी भी तृतीय-पक्ष स्थापनाओं की आवश्यकता नहीं हो सकती है। लेकिन कभी कोई उपकरण ऑपरेटिंग सिस्टम में नया है , तो यूजर को डिवाइस बनाने वाली वेबसाइटों या वैकल्पिक स्रोतों से ड्राइवर डाउनलोड करने पड़ सकते हैं।

फर्मवेयर ( Firmware )

फर्मवेयर एक तरह से ऑपरेटिंग सिस्टम ही है जो OS को पहचानने के लिए रोम या एप्रोम मेमोरी चिप के अंदर इनबिल्ड रहता है। और इसका मुख्य काम अपने कंप्यूटर सिस्टम के हार्डवेयर के सभी कामो पर कंट्रोल करने का होता है।

प्रोग्रामिंग लैंगुएज ट्रांसलेटर ( Programing Language Translater )

प्रोग्रमिंग लैंगुएज ट्रांसलेटर एक ऊँचे लेवल का भाषा बदलने का कोड है जो कंप्यूटर सिस्टम द्वारा भाषा का अनुवाद करता है। ये प्रोग्रामिंग लैंगुएज ट्रांसलेटर भाषा का एक संग्रह है जो मनुष्यों के लिए समझना और कोड करना आसान है (यानी, जावा, सी ++, पायथन, पीएचपी, बेसिक) ये कोड पहले जटिल कोड है जिसे केवल प्रोसेसर द्वारा ही समझा जा सकता है।

यूटिलिटीज ( Utilities )

यूटिलिटीज भी कंप्यूटर सिस्टम सॉफ्टवेयर के प्रकारो में से एक प्रकार है जो ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के बीच में रहता है। ये कंप्यूटर सिस्टम के रखरखाव के कामो के लिए एक बहुत ही अच्छा प्रोग्राम है। जो कंप्यूटर सिस्टम के बेहतरीन ढंग से काम करने के लिए सुनिश्चित करने के काम आता है। इनके सभी काम जरूरी डाटा सुरक्षा से लेकर डिस्क ड्राइव डीफ़्रैग्मेन्टेशन तक अलग-अलग होते है। ज्यादातर तृतीय-पक्ष डिवाइस है लेकिन वे ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ बण्डल में आ सकते है। ये कंप्यूटर सिस्टम में तृतीय-पक्ष डिवाइस व्यक्तिगत रूप से मौजूद है या यू कहो की इनको एक साथ बण्डल किए गए हो जैसा की हिरेन बूट सीडी , अल्टीमेट बूट सीडी और कैस्परस्की रेस्क्यू डिस्क।

उपयोगिता सॉफ्टवेयर के उदाहरणों और विशेषताओं में शामिल हैं :-

फ़ाइलों और अनुप्रयोगों की सुरक्षा के लिए एंटीवायरस और सुरक्षा सॉफ़्टवेयर, जैसे, मालवेयरबाइट्स, माइक्रो सॉफ्ट सुरक्षा अनिवार्य, और AVG। डिस्क विभाजन सेवाएं जैसे कि विंडोज डिस्क की व्यवस्था करना, ईज़ीस पार्टिशन मास्टर और पार्टिशन मैजिक।
डिस्क पर बिखरी हुई फाइलों को व्यवस्थित करने के लिए डिस्क फाइल सिस्टम के रखरखाव और उदाहरणों में डिस्क फाइल सिस्टम के रखरखाव में , परफेक्ट डिस्क , डिस्क कीपर , कोमोडो फ्री फ़ायरवॉल और लिटिल स्निच शामिल हैं।
WinRAR , Winzip , और 7-Zip जैसे डिस्क स्थान को अनुकूलित करने के लिए फ़ाइल को दबाने का काम करते है। सुरक्षा कारणों से डेटा बैकअप, जैसे, कोबियन, क्लोनज़िला और कोमोडो। हार्ड डिस्क सेंटिनल, मेमटेस्ट और परफॉर्मेंस मॉनिटर जैसी हार्डवेयर डायग्नोस्टिक सेवाएं कंप्यूटर सिस्टम में यूटिलिटीज के जरिये मौजूद होती है।
खोए हुए डेटा को वापस पाने में मदद करने के लिए डेटा रिकवरी। उदाहरणों में iCare डेटा रिकवरी, Recuva, और EaseUs डेटा रिकवरी विज़ार्ड शामिल हैं। बाहरी खतरों से सुरक्षा के लिए फ़ायरवॉल, जैसे, विंडोज फ़ायरवॉल सेवाएं कंप्यूटर सिस्टम में यूटिलिटीज के जरिये मौजूद होती है।

सॉफ्टवेयर का इतिहास | History of Software in Hindi

दोस्तों दुनिया ने कंप्यूटिंग में कई छोटे-बड़े बदलाव देखे हैं जैसे की बड़े-बड़े कंप्यूटर हार्डवेयर सिस्टम रखने से लेकर मोबाइल डिवाइस का उपयोग करने तक जो आपकी जेब में फिट हो सकते हैं वो इस दुनिया ने अपनी आँखों से देखा है। सॉफ्टवेयर के विकास का इतिहास 1940 के दशक का है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर और डेवलपर्स तब बड़े पैमाने पर फंक्शन बिजनेस सिस्टम की जरूरत को पूरा करने के लिए उत्पादों को डिजाइन कर रहे थे।

आज सॉफ्टवेयर का विकास इतना ज्यादा हो गया है कि जो आम तौर पर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के साथ काम करता है, और भी उच्च सुविधाओं के साथ अधिक तकनीकें बनाई जाती हैं।सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और विकास के इतिहास को समझने के लिए, हमें पहले यह समझना होगा कि इनका मतलब क्या है। सॉफ्टवेयर विकास एक कंप्यूटर प्रोग्राम की रचनात्मकता में निहित है जो अंतिम यूजर के लिए आवश्यक सॉफ़्टवेयर का उत्पादन करना है। सॉफ्टवेयर डेवलेपर तब सॉफ्टवेयर चलाने के लिए आवश्यक कोड बनाने के लिए कंप्यूटर प्रोग्रामर की मदद करते है ।

इस बीच, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग सॉफ्टवेयर को तैयार करने के लिए इंजीनियरिंग सिद्धांतों के उपयोग से संबंधित है। सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के पास ऐसे उपकरण होते हैं जिनका उपयोग डेवलेपर अपने एप्लिकेशन और प्रोग्राम को बनाने के लिए करते हैं।

कंप्यूटर के सिस्टम और उनके उपयोग करने वाले लोगों को जोड़ने के लिए बनाए गए एक इंटरफ़ेस के रूप में, सॉफ़्टवेयर में प्रोग्रामिंग भाषाएं , डेटा , निर्देश और जानकारी शामिल होती है जो यह निर्धारित करती है कि कंप्यूटर एक हाथ में कई कामों को कैसे पूरा करेगा।

प्रोग्रामर द्वारा अनुसरण किए जाने वाले मानव-पठनीय निर्देश एक स्रोत कोड में हैं। स्रोत को एक कंपाइलर के माध्यम से चलाया जा रहा है जो इसे सॉफ्टवेयर के लिए मशीन कोड में बदलने के लिए जिम्मेदार है।

सॉफ्टवेयर का क्या काम है | Software Ka Kya Kaam Hai

कंप्यूटर सिस्टम सॉफ़्टवेयर , जिसे सॉफ़्टवेयर भी कहा जाता है, जो दिए गए इनपुट निर्देशों और दस्तावेज़ीकरण का एक सेट है जो कंप्यूटर सिस्टम को बताता है कि क्या करना है या कोई से काम को कैसे करना है। सॉफ्टवेयर में कंप्यूटर सिस्टम पर सभी अलग-अलग प्रोग्राम सम्मिलित होते हैं, जैसे एप्लिकेशन और ऑपरेटिंग सिस्टम , सिस्टम सॉफ्टवेयर एक प्रकार का कंप्यूटर प्रोग्राम है जिसे कंप्यूटर के हार्डवेयर और एप्लिकेशन प्रोग्राम को चलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

सॉफ्टवेयर क्या है explain ?

सॉफ्टवेयर एक प्रकार की एप्लीकशन होती है जो दिए गए इनपुट निर्देशों , डाटा या प्रोग्राम का एक सेट होता है जिसका प्रयोग कंप्यूटर सिस्टम को संचालित करने एवं खास कामों को बाकि ना छोड़ने के लिए किया जाता है। सॉफ्टवेयर कंप्यूटर सिस्टम के हार्डवेयर का उल्टा ( विपरीत ) होता है। जो हमारे कंप्यूटर सिस्टम के जितने भी फिजिकल मटेरिअल होते है उनके बारे में हमे जानकारी देता है।

भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी का नाम क्या है ?

भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कम्पनी का नाम टीसीएस ( TCS = Tata Consultancy Service ) है।

दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी कौन सी है ?

दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट कंपनी को कहा जाता है। जो कि एक अमेरिकन मल्टीनेशन टेक्नोलॉजी कम्पनी है।

इंडिया में कितनी सॉफ्टवेयर कंपनी है ?

इंडिया में मौजूद सॉफ्टवेयर कंपनी
1. Tata Consultancy Services – TCS
2. Infosys
3. Wipro
4. HCL Technologies
5. Tech Mahindra
6. L&T Infotech
7. Mindtree Limited
8. Mphasis Limited
9. Oracle Financial Services
10. Coforge Ltd.

सॉफ्टवेयर कौन सी कंपनी बनाती है ?

सॉफ्टवेयर बनाने वाली बहुत सी कंपनीया मौजूद है जो सॉफ्टवेयर बनाती है।
जैसे कि :-
1. Microsoft
2. Tata Consultancy Services – TCS
3. Infosys
4. Wipro
5. HCL Technologies
6. Tech Mahindra
7. L&T Infotech
8. Mindtree Limited
9. Mphasis Limited
10. Oracle Financial Services
11. Coforge Ltd.

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