संविधान क्या है, सिद्धांत की पूरी जानकारी | Sanvidhan kya hai in Hindi

संविधान क्या है, सिद्धांत की पूरी जानकारी | Sanvidhan kya hai in Hindi

संविधान क्या है, सिद्धांत की पूरी जानकारी | Sanvidhan kya hai in Hindi

संविधान क्या है, सिद्धांत की पूरी जानकारी | Sanvidhan kya hai in Hindi – तो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में संविधान के बारे में बात करेंगे और जानने की कोशिश करेंगे कि ये संविधान क्या होता है , तो दोस्तों अगर आप भी इस संविधान के बारे में जानने की इच्छा रखते हो , तो आप सही जगह आये है , फिर बने रहे हमारे साथ इस आर्टिकल के अंत तक , ताकि आपके ज्ञान में और भी ज्यादा वृद्धि हो और आप नया ज्ञान प्राप्त कर सकें और अपने इस ज्ञान का सही जगह इस्तेमाल कर सकें। तो चलिए दोस्तों अब हम बात करेंगे संविधान के बारे में और जानने की कोशिश करेंगे की ये संविधान आखिर में क्या होता है :-

संविधान क्या है ? Sanvidhan kya hai in Hindi

संविधान सिद्धांतों और प्रथाओं का समूह है जो राजनीतिक राज्य का मूल आधार बनाते हैं। कुछ उदाहरणों में जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका में, संविधान एक विशेष लिखित दस्तावेज है। अन्य उदाहरणों में, जैसे यूनाइटेड किंगडम में, यह कानूनों, दस्तावेजों और प्रथागत प्रथाओं से बना है जिन्हें आमतौर पर राजनीतिक मुद्दों को नियंत्रित करने के लिए माना जाता है। लिखित संविधान वाले राज्यों में परंपरागत या पारंपरिक प्रथाओं का संग्रह भी हो सकता है जिन्हें संवैधानिक रूप से वैध माना जा सकता है या नहीं। लगभग हर राज्य के दावों का एक संविधान होता है, हालांकि ऐसे कई उदाहरण हैं जहां सरकार संवैधानिक रूप से सही तरीके से काम नहीं करती है।

संविधान और संविधानवाद का विचार सबसे पहले प्राचीन यूनानियों द्वारा कल्पना की गई थी और अरस्तू के सैद्धांतिक, व्यवस्थित मानक, वर्णनात्मक और नियामक ग्रंथों में विशेष रूप से स्पष्ट था। अपनी राजनीति, निकोमैचियन एथिक्स, एथेंस के संविधान के साथ-साथ अन्य कार्यों के कार्यों के भीतर, अरस्तू ने ग्रीक शब्द का इस्तेमाल किया जो विभिन्न अर्थों में संवैधानिक प्रणाली (पोलिटिया) को संदर्भित करता है। सबसे बुनियादी और तटस्थ परिभाषाएँ “”पोलिस” (राज्य) के कार्यालयों की व्यवस्था थी। इस अर्थ में, शब्द का विशुद्ध रूप से वर्णनात्मक, प्रत्येक राष्ट्र का एक संविधान होता है, भले ही वह कितना भी खराब या असंगत रूप से शासित हो।

भारत में संविधान कब लागू हुआ ? Bharat Mein Sanvidhan kab Lagu hua ?

हमारे देश में जिस संविधान के अनुसार जितने भी काम हो रहे है , उस संविधान को 26 जनवरी 1950 में हमारे देश में लागू किया गया था। पहले से मौजूद ब्रिटिश कानून भारत सरकार अधिनियम (1935) को भारतीय संविधान के माध्यम से भारतीय शासन के दस्तावेज के रूप में बदल दिया गया था।

हमारा भारत देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था , लेकिन इसकी आजादी की घोषणा 7 से 8 महीने पहले ही कर दी गई थी और पहले से ही देश का नया संविधान ( कानून ) लिखने का काम शुरू कर दिया गया था। ब्रिटिश काल के समय में जो हमारे भारत देश का संविधान था उसी संविधान के अनुसार बनाकर के पूरा नया संविधान किया गया था।

हमारे देश के संविधान को बनाने में करीब 2 साल 11 महीने 18 दिन लगे थे यानि के लगभग पूरे 3 साल लगे थे संविधान को बनाने में लेकिन जब संविधान को लागू किया गया तब लोगो को इस संविधान के बारे में टुकड़ो-टुकड़ो में बताया गया था। ऐसे ही लोगो को धीरे-धीरे संविधान के बारे में जानकारी दी गयी और फिर संविधान को 26 जनवरी 1950 में सम्पूर्ण तरीके से लागू कर दिया गया था।

यानि के आज़ादी के करीब 3 साल बाद मतलब के सन 1947 से बनना शुरू हुआ और 1950 में संविधान बन कर तैयार हुआ और उसी समय यानि के 26 जनवरी 1950 में भारत देश में सम्पूर्ण तरीके से संविधान को लागू कर दिया गया था। लेकिन जब 26 जनवरी 1950 में संविधान को लागू किया गया था तब उसके साथ ही हमारे देश भारत में लोकतंत्र के नए सेलेब्स भी बन गए थे।

भारत के संविधान का सिद्धांत ? Bhart ke Sanvidhan ka sidhant

भारतीय संविधान का सिद्धांत केवल संवैधानिक संशोधनों पर लागू होता है जो यह बताता है कि संसद भारतीय संविधान के बुनियादी ढांचे को नष्ट या बदल नहीं सकती है। संविधान का सिद्धांत के संबंध में उच्चतम न्यायालय के कई महत्वपूर्ण निर्णय होते हैं। संविधान संसद और राज्य विधानमंडल हो या विधानसभाओं को उनके संबंधित क्षेत्र अधिकार के भीतर कानून बनाने का अधिकार देता है।

संविधान संसद और राज्य विधान मंडलों या विधानसभाओं को उनके संबंधित क्षेत्र अधिकार के भीतर कानून बनाने का अधिकार देता है। संविधान में संशोधन करने के लिए बिल संसद में ही पेश किया जा सकता है लेकिन ये शक्ति पूर्ण नहीं है। यदि सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि संसद द्वारा बनाया गया कानून संविधान के साथ न्याय संगत नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट पास इसे अमान्य घोषित करने की शक्ति रखती है। इस प्रकार मूल्य संविधान के आदर्शों और दर्शनों की रक्षा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में बुनियादी संरचना सिद्धांत को निर्धारित किया है स्थान के अनुसार संसद संविधान के बुनियादी ढांचे में परिवर्तन नहीं कर सकती है।

  1. प्रस्तावना में संविधान के स्त्रोत का उल्लेख है और कहा गया है “हम भारत के लोग संविधान को अंगीकृत अधिनियमित तथा आत्मर्पित करते हैं” इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि संविधान का निर्माण भारतीय जनता के द्वारा किया गया है। इस प्रकार भारत की जनता ही समस्त राजनीतिक संस्था का स्त्रोत है यह सच है कि समस्त भारतीय नागरिक ने इसका निर्माण नहीं किया है फिर भी यह सच्चाई है के इसका निर्माण करने वाले जनता के प्रतिनिधित्व थे। इन प्रतिनिधियों ने यह स्वीकार किया कि संपूर्ण स्वराज शक्तियों का मूल स्त्रोत भारतीय जनता में निहित है। 1950 ईस्वी में गोपाल नंदलाल ( गोपाल वर्सेस स्टेट ऑफ मद्रास ) में सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसी आशय का निर्णय दिया और इसमें स्पष्ट किया कि भारतीय जनता ने अपनी इच्छा को व्यक्त करते हुए लोकतंत्रात्मक आदर्श अपना है।
  2. प्रस्तावना भारतीय संविधान के अनुच्छेद आदर्शों का परिचय देती है। जिन्हें भारतीय जनता ने शासन के माध्यम से लागू करने का निर्णय किया है इन आदर्शों का उद्देश्य न्याय , स्वतंत्रता , समानता , बंधुत्व या राष्ट्र की एकता एवं अखंडता स्थापित करना है।
  3. प्रस्तावना भारत संघ के संपर्क था तथा उसके लोकतंत्रात्मक स्वरूप की आधारशिला है। प्रस्तावना में कहा गया है कि भारत में संविधान द्वारा एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना की है।
  4. संविधान के 42 संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़ दिया गया है। इस प्रकार भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश घोषित किया गया है इसका अभिप्राय यह हुआ कि संविधान में सभी नागरिकों को विश्वास , धर्म तथा उपासना पद्धति की स्वतंत्रता प्रदान की जाएगी।
  5. आज प्रस्तावना द्वारा भारत को समाजवादी देश घोषित किया गया है। 42वां संशोधन अधिनियम के द्वारा ही प्रस्तावना में यह शब्द जोड़ा गया है।

प्रस्तावना में कुछ शब्दों का उल्लेख किया गया है जैसे कि :- संप्रभुता , समाजवाद , धर्म निरपेक्ष , लोकतांत्रिक , गणराज्य , न्याय , स्वतंत्रता , समानता और बंधुत्व

संप्रभुता :-

संप्रभु शब्द का आशय है कि ना तो भारत किसी देश पर निर्भर है ना किसी देश का उपनिवेश है। इसके ऊपर कोई शक्ति नहीं है और वह अपने मामलों का निवारण करने के लिए स्वतंत्र है। कोई भी देश भारत के आंतरिक मामलो में दखल अंदाजी नहीं कर सकता।

समाजवाद :-

वर्ष 1976 में 42वां संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए शब्द का आशय भारतीय समाजवाद लोकतांत्रिक समाजवाद है जो मिश्रित अर्थव्यवस्था में आस्था रखता है। भारतीय समाजवाद मार्कस वाद और गांधीवाद का मिला जुला रूप है जिसमें गांधीवादी समाजवाद की तरफ जाता झुका हुए।

लोकतांत्रिक :-

भारतीय संविधान में प्रतिनिधि संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था प्रस्तावना में लोकतांत्रिक शब्द का व्रहद अर्थों में पड़ा हुआ है। जिसमें ना केवल राजनीतिक लोकतंत्र बल्कि सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र को भी शामिल किया गया है। भारतीय लोकतंत्र में सर्वोच्च सकती यहां की जनता में निहित है।

धर्मनिरपेक्ष :-

धर्मनिरपेक्ष शब्द को 42वां संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा जोड़ा गया है। धर्मनिरपेक्ष शब्द से आशय है कि देश सभी धर्मों का सम्मान रूप से रक्षा करेगा वह स्वयं किसी धर्म को राज्य का धर्म नहीं मानेगा और देश के सभी नागरिको को अपने धर्म के हिसाब से सरे काम करने की पूरी आजादी है।

गणतंत्र :-

गणतंत्र इस से आशय है कि देश का राष्ट्रपति भी चुनाव के जरिए चुना जाता है और निश्चित समय के लिए चुना जाता है। राजनीतिक संप्रभुता लोगों के हाथों में होती है और कई विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग नहीं होता है।

न्याय :-

प्रस्तावना में न्याय तीन विभिन्न रूपों मैं शामिल है सामाजिक , आर्थिक व राजनीतिक इनकी सुरक्षा मौलिक अधिकार और नीति निदेशक सिद्धांतों के उपबंधों के जरिए की जाती है। सामाजिक , आर्थिक और राजनीतिक न्याय के तीन तत्वों को रूसी क्रांति 1917 अधिनियम से लिया गया है।

स्वतंत्रता :-

स्वतंत्रता का अर्थ है लोगों की गतिविधियों पर किसी प्रकार की रोक टोक नही की जाएगी और नागरिको की अनुपस्थिति तथा साथ ही व्यक्ति के विकास के लिए समान अवसर प्रदान करना हमारी प्रस्तावना में स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व के लिए शामिल किया गया है। इन आदर्शों को फ्रांस की क्रांति 1990-1999 के अधिनियम से लिया गया है।

समता :-

समता का अर्थ है समाज के किसी भी वर्ग के लिए विशेष अधिकार के अनुपस्थिति और बिना किसी भेदभाव के सभी व्यक्तियों को समान अवसर प्रदान करना है।

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भारत के संविधान में कितने पेज है ?

भारत के संविधान में 251 पेज है , जिसे दुनिया के सभी लोकतांत्रिक देश के संविधान को परख कर के तैयार किया गया है। इस संविधान को बनाने के लिए 308 सदस्यों की समितियों ने मिलकर के काम किया था।

भारत के संविधान में कितने शब्द है ?

भारत का संविधान दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों के मुकाबले सबसे बड़ा और सबसे लम्बा संविधान है , जिसमें उसके अंग्रेज़ी-भाषा संस्करण में 146,385 शब्दों के साथ, 25 भागों में 448 अनुच्छेद ( ACT ), 12 अनुसूचियाँ और 104 (1951 to 2019) संशोधन हैं और हमारा देश विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है।

भारत का संविधान किसने लिखा था ?

तो दोस्तों आपको ये जानकर के हैरानी होगी के जिस संविधान के अनुसार हमारे देश में जितने भी काम हो रहे है , उस संविधान को बनाने के लिए 308 सदस्यों की समितियों ने मिलकर के काम किया था। लेकिन इस संविधान का प्रारूप भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने तैयार किया था। जिन्हे भारत देश की 80 % जनता भारतीय संविधान के निर्माता के रूप में जानती है। कई सुधारों और परिवर्तनों के बाद, समिति के 308 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को हस्तलिखित कानून की दो प्रतियों पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद इसे दो दिन बाद 26 जनवरी को देश में लागू किया गया।

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