साबुन क्या है परिभाषा दें | Sabun kya hai in Hindi

साबुन क्या है परिभाषा दें | Sabun kya hai in Hindi

साबुन क्या है परिभाषा दें | Sabun kya hai in Hindi

साबुन क्या है परिभाषा दें | Sabun kya hai in Hindi – तो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में साबुन के बारे में बात करेंगे और जानने की कोशिश करेंगे कि ये साबुन आखिर में होता क्या है और इस साबुन के प्रकार कौन-कौन से है तथा इस साबुन की क्रिया विधि क्या है , तो दोस्तों अगर आप भी इस साबुन के बारे में जानने की इच्छा रखते है , तो फिर बने रहे हमारे साथ इस आर्टिकल के अंत तक , ताकि आपके ज्ञान में और भी ज्यादा वृद्धि हो और आप कुछ नया ज्ञान प्राप्त कर सकें और अपने इस प्राप्त ज्ञान का सही जगह इस्तेमाल कर सकें। तो चलिए दोस्तों अब हम बात करेंगे साबुन के बारे में और जानने की कोशिश करेंगे कि ये साबुन आखिर में होता क्या है और इस साबुन के प्रकार कौन-कौन से होते है तथा इस साबुन की क्रिया विधि क्या होती है :-

साबुन क्या है परिभाषा दें | Sabun kya hai in Hindi
साबुन क्या है परिभाषा दें | Sabun kya hai in Hindi

साबुन को अंग्रेजी में Soap ( सोप ) कहते है।

साबुन क्या है ? Soap Kya hai

साबुन एक ऐसा पदार्थ होता है , जो हमारे कपड़ो , घर के बर्तनो और हमारी त्वचा को पानी में घुल कर के साफ़ करता है। इस साबुन को हम रोज यूज़ करते है , इसके बिना हमारा दिन का आधे से ऊपर काम अधूरा रहता है। अगर हमारे घर में साबुन उपस्थित ना हो तो हम इसके बिना ना तो सही से नहा नहीं सकते , साबुन अगर हमारे घर में नहीं है तो हम हमारे कपड़ो और बर्तनो को सही से साफ नहीं कर सकते है।

साबुन तो एक उच्च वसीय अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण का मिश्रण होता है , जिसे साबुन कहते है। जैसे कि :- सोडियम स्टीयरेट और पोटैशियम पामिटेट आदि , इसे तेल एवं वसा को क्षार के द्वारा जल-अपघटित करके बनाया जाता है और इस होने वाली सम्पूर्ण प्रक्रिया को साबुनीकरण है।

इसके अलावा भी अगर हम आसान शब्दों में समझे कि साबुन किसे कहते है , तो दीर्घ श्रृंगला वाले वसीय अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण को साबुन कहते है और इसी साबुन को बनाने की प्रक्रिया को साबुनीकरण कहते है।

साबुनीकरण को अंग्रेजी में Saponification ( सैपोनिफिकेशन ) कहते है।

साबुनीकरण की प्रक्रिया कैसे होती है ?

तो दोस्तों जैसा कि हम आपको ऊपर बता चुकें है कि साबुन किसे कहते है और साबुन कैसे बनता है।

तो दोस्तों जैसा कि हम सब अब जान चुके है कि साबुन को बनाने की क्रिया को ही साबुनीकरण कहते है। तो चलिए अब हम जानेंगे कि साबुनीकरण की प्रक्रिया कैसे होती है :-

जब हम तेल या वसा को क्षार के साथ गर्म करते है , तो यह जल-अपघटित होकर के हमे ग्लेसरीन और साबुन प्रदान करते है। इस होने वाली सम्पूर्ण प्रक्रिया को साबुनीकरण कहते है।

उदाहरण की मदद से समझिए जैसे कि :- तेल या दीर्घ श्रृंगला वाले वसीय अम्ल + क्षार = ग्लेसरीन और साबुन प्राप्त हुए।

नोट :- ध्यान रहे साबुनीकरण की प्रक्रिया मिट्टी के तेल से पूर्ण नहीं होगी क्यों कि मिट्टी के तेल में हाइड्रोकार्बन का मिश्रण होता है। जिस वजह से किसी भी प्रकार के उच्च वसीय अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण को साबुन में बदला नहीं जा सकता है।

साबुन के प्रकार कौन-कौन से होते है ?

तो दोस्तों अगर आप साबुन के प्रकार जानना चाहते हो , तो इसके लिए आप को नीचे दिए गए पॉइंट को ध्यान से पढ़ना होगा और हम आपको बताते चलें कि साबुन के निम्न प्रकार होते है :-

प्रसाधन साबुन :-

ये प्रसाधन साबुन उच्च वसीय अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण के साथ क्रिया कर के बनते है।

पारदर्शी साबुन :-

इस पारदर्शी साबुन को अल्कोहल में घोल कर के बनाया जाता है।

औषध साबुन :-

इन औषध साबुन में रोगाणुरोधक ( Antiseptics ) पदार्थो को मिला कर के बनाया जाता है।

साबुन में तैरने वाले साबुन :-

इस साबुन में तैरने वाले साबुन को बनाते समय इसके बीच में हवा प्रवाहित की जाती है। जिस वजह से इन साबुनो को देखने पर ऐसा व्यतीत होता है जैसे कि साबुन के अंदर एक और साबुन तैर रहा है।

साबुन की क्रिया विधि क्या होती है ?

तो दोस्तों चलिए जानने की कोशिश करते हैं कि साबुन की क्रियाविधि क्या होती है :-कार्बोक्सिलिक समूह 

तो दोस्तों आपको जानकर हैरानी होगी के साबुन के अणुओं के दो भाग होते हैं , साबुन के एक अणु का भाग लंबे हाइड्रोकार्बन श्रृंखला का होता है जो अनआयनिक होता है और साबुन का दूसरा अणु जो छोटा कार्बोक्सिलिक समूह का होता है जो आयनिक होता है।

साबुन के एक अणु का भाग लंबे हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाला जल को प्रतिकर्षित करने वाला होता है या जल विरोधी होता है परंतु वह धूल तथा चिकनाई जैसे मेल के कार्बनिक कणों को अपने साथ जोड़ लेता है। इसलिए मेला कपड़ों की सतह पर उपस्थित धूल तथा चिकनाई के साबुन का हाइड्रोकार्बन वाले भाग से जुड़ जाते हैं।

साबुन के अणु का आयनिक भाग जल-स्नेही होता है , जो जल के अणुओं की ओर आकर्षित होता है और अपने हाइड्रोकार्बन भाग में चिपके धूल तथा चिकनाई के कणों को अपने साथ खींचकर जल में ले आता है। इस प्रकार मैले कपड़े की सतह पर लगे धूल तथा चिकनाई के सारे कण साबुन के अणुओं के साथ लगकर जल में आ जाते हैं तथा मैला कपड़ा साफ हो जाता है।

जब साबुन को जल में घोलते हैं तो वह मिसेल बनाता है। इस मिसेल में साबुन के अणु अरीय ढंग से व्यवस्थित होते हैं। जिसमें हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाला भाग केन्द्र की ओर होता है। तथा जल को आकर्षित करने वाला कार्बोक्सिलिक भाग बाहर की ओर रहता है।

जब साबुन के पानी में धूल तथा चिकनाई लगा मैला कपड़ा डालते हैं तो मिसेलों के हाइड्रोकार्बन श्रृंखलाओं वाले सिरे मैले कपड़े की सतह पर उपस्थित धूल तथा चिकनाई के कणों के साथ जुड़ जाते हैं तथा उन्हें अपने बीच फंसा लेते हैं। इसके बाद मिसेलों के बाहर की ओर वाले आयनिक सिरे जल के अणुओं की ओर आकर्षित होते हैं जिससे हाइड्रोकार्बन वाले सिरों में फँसे मैल के कण कपड़े की सतह से खिंचकर जल में आ जाते हैं तथा कपड़ा साफ हो जाता है। 

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नहाने का साबुन कैसे बनता है ?

नहाने का साबुन बनाने के लिए हमें तेल या वसा को क्षार के साथ गर्म करना होता है , तो इसके बाद यह जल-अपघटित होकर के हमे ग्लेसरीन और साबुन प्रदान करते है। इसके अलावा साबुन में खुशबु के लिए इसमें अलग से फ्लेवर मिलाया जाता है।

साबुन में तैरने वाले साबुन को कैसे बनातें है ?

इस साबुन में तैरने वाले साबुन को बनाते समय इसके बीच में हवा प्रवाहित की जाती है। जिस वजह से इन साबुनो को देखने पर ऐसा व्यतीत होता है जैसे कि साबुन के अंदर एक और साबुन तैर रहा है।

साबुन किसे कहते है और ये कितने प्रकार के होते है ?

साबुन तो एक उच्च वसीय अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण का मिश्रण होता है , जिसे साबुन कहते है। जैसे कि :- सोडियम स्टीयरेट और पोटैशियम पामिटेट आदि , इसे तेल एवं वसा को क्षार के द्वारा जल-अपघटित करके बनाया जाता है और यह चार प्रकार के होते है :-
1. प्रसाधन साबुन :-
2. पारदर्शी साबुन :-
3. औषध साबुन :-
4. साबुन में तैरने वाले साबुन :-

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