राजकीय शोक क्या होता है, और क्या-क्या बंद रहता है | Rajkiya Shok kya hota hai

राजकीय शोक क्या होता है, और क्या-क्या बंद रहता है | Rajkiya Shok kya hota hai

राजकीय शोक क्या होता है, और क्या-क्या बंद रहता है | Rajkiya Shok kya hota hai

राजकीय शोक क्या होता है, और क्या-क्या बंद रहता है | Rajkiya Shok kya hota hai – तो दोस्तों आज हम आपके सामने लेकर आए है बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी, जिसके जानने बाद आपको एहसास होगा के सच में ये बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी थी। क्यों कि आज हम आपको बताने वाले है राजकीय शोक के बारे में जो कि अभी ये बहुत ही चर्चा में है। हम आपको बताएंगे कि ये राजकीय शोक क्या होता है और इस राजकीय शोक की घोषणा कौन करता है तथा इस राजकीय शोक में क्या-क्या बंद रहता है। तो दोस्तों इन सब के अलावा भी और भी बहुत कुछ के बारे में जानने के लिए बने रहे हमारे साथ इस आर्टिकल के अंत तक बने रहे।

राजकीय शोक क्या होता है | Rajkiya Shok kya hota hai?

भारत में पहले ” राष्ट्रीय शोक ” केवल राष्ट्रपति और पूर्व राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री के स्वर्गवास ( यानि के निधन / मृत्यु ) पर घोषित किया जाता था। हालांकि भारत में सबसे पहले राष्ट्रीय शोक राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी की हत्या के बाद घोषित गया था। लेकिन समय के साथ-साथ इन नियमो में कई सारे बदलाव किए गए है, अब अन्य बड़े नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों के मामलों में भी केंद्र विशेष आदेश जारी कर राष्ट्रीय शोक का ऐलान कर सकता है। इसके साथ ही देश में किसी बड़े संकट के समय भी ” राष्ट्रीय शोक ” को घोषित किया जा सकता है।

-: उदाहरण :-

जैसे कि :- सोमवार को समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का 82 वर्षीय की उम्र में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। जिनके निधन के शोक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिंदी में एक ट्वीट कर कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार ने मुलायम सिंह यादव के निधन पर तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।” सूत्रों के मुताबिक आदित्यनाथ ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव से भी फोन पर बात की और संवेदना व्यक्त की।

राजकीय शोक की घोषणा कौन करता है | Rajkiya Shok ki Ghoshna kon karta hai?

पुराने नियमो के अनुसार पहले यह घोषणा केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति ही करता था। लेकिन समय के साथ-साथ इन नियमो में कई सारे बदलाव किए गए है, अब राजकीय शोक की घोषणा करने का अधिकार राज्यों को भी दिया जा चूका है। अब राज्य सरकार खुद तय कर सकती है कि किसे राजकीय सम्मान देना है या किसे नहीं देना है। बहुत सी बार तो ऐसा देखने को मिलता है कि राज्य और केंद्र सरकार दोनों ही अलग-अलग राजकीय शोक की घोषणा करते है।

राजकीय शोक में क्या-क्या बंद रहता है | Rajkiya Shok me kya-kya band rehta hai?

तो दोस्तों हम आपको बताते चले की ये केंद्र सरकार के 1997 के अधिसूचना में कहा गया है कि राजकीय शवयात्रा के दौरान कोई सार्वजनिक छुट्टी जरूरी नहीं है। इस केंद्र सरकार के 1997 के अधिसूचना के अनुसार, अनिवार्य सार्वजनिक छुट्टी को इस दौरान खत्म कर दिया गया है। अब केवल इसी हालत में छुट्टी की घोषणा होती है जब राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए किसी व्यक्त‍ि का निधन हो जाता है। लेकिन अक्सर पद पर न रहने वाले बड़े नेताओं की मृत्यु के बाद भी सार्वजनिक अवकाश की घोषणा कर दी जाती है। राजकीय शोक के दौरान फ्लैग कोड ऑफ इंडिया नियम के मुताबिक विधानसभा, सचिवालय सहित महत्वपूर्ण कार्यालयों में लगे राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहते हैं। इसके अलावा प्रदेश में कोई औपचारिक एवं सरकारी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाता है और इस अवधि के दौरान समारोहों और आधिकारिक मनोरंजन पर भी प्रतिबंध रहता है।

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