हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब पर जीवनी | Prophet Muhammad Biography In Hindi Pdf

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब पर जीवनी | Prophet Muhammad Biography In Hindi Pdf

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब पर जीवनी | Prophet Muhammad Biography In Hindi Pdf

दोस्तों आज इस लेख में हम आपको हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब पर जीवनी | Prophet Muhammad Biography In Hindi Pdf के बारे में बताएँगे मुहम्मद साहब को Michael H. Hart ने सबसे ज़्यादा प्रभावशाली आदमी बताया हैं तो आज हम आपको विस्तार के साथ मुहम्मद साहब की जीवनी बताएंगे और उनके परिवार के बारे में बताएंगे और वह कैसे थे। तो इस लेख को अंत तक ज़रुरु पढ़े। हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब पर जीवनी | Prophet Muhammad Biography In Hindi Pdf

नाम मुहम्मद , अहमद
जन्म दिनांक 570 ईस्वी (12 रबीउल अव्वल )
मृत्यु की दिनांक 632 ईस्वी (11 हिजरी )
उम्र63 साल
पिता का नाम अब्दुल इब्न अब्द अल- मुत्तलिब
माता का नाम अमीनः बिन्ते वहाब
दादा का नाम अब्द अल- मुत्तलिब
बच्चो के नाम रुक़य्या , उम्मे कुलसुम , ज़ैनब , फातिमा , इब्राहिम
बीवियों के नाम खदीजा , सौदा , आइशा , हफ्सा , हिन्द, रेहाना , ज़ैनब ,जुवार्रिया , सफ़िया , रमला , मरियाः , मैमुना
भाई हम्ज़ा , अली (चचेरा भाई )
क़बीला बनु हाशिम
हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब पर जीवनी | Prophet Muhammad Biography In Hindi Pdf

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हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब कौन थे ?

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब इस्लाम धर्म के आखरी नबी थे जिन्हे अल्लाह (ईश्वर) ने लोगो को सही रास्ते पर और अच्छाई के रास्ते पर चलने की हिदायत देने के लिए भेजा था। जो लोगो को सिखाते थे के एक ईश्वर की प्रार्थना करो किसी के साथ बुरा ना करो और हमेशा सच कहो, गरीबो के साथ अच्छा व्यव्हार करो ।

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब की कितनी बीवी थी ?

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब ने अपनी पूरी ज़िन्दगी में 12 शादी करी थी जिसमे उनकी सबसे पहली बीवी खदीजा थीं , पैगम्बर मुहम्मद साहब ईश्वर के भेजे हुए दूत थे जो खुद की मर्ज़ी से कोई काम नहीं करते थे बल्कि वह वही करते थे जो ईश्वर उनसे करने के लिए कहता था , पैगम्बर मुहम्मद की सबसे पहली बीवी खदीजा थी और खदीजा जब तक इस दुनिया में ज़िंदा थी तब तक पैगम्बर मुहम्मद ने कोई दूसरी शादी नहीं करी लेकिन जब खदीजा का देहांत हो गया उसके बाद पैगम्बर मुहम्मद साहब ने दूसरी शादिया करी , और पैगम्बर मुहम्मद के जितने भी बच्चे थे वह सब खदीजा की ही औलाद है।
पैगम्बर मुहम्मद ने अपनी पहली शादी खदीजा से तब करी जब वह 25 साल के थे और खदीजा 40 साल की थी , पैगम्बर मुहम्मद ने अपनी शादी ईश्वर के कहने पर यातो किसी बेवा औरत से करी या फिर किसी गुलाम औरत से करी और उन्होंने ईश्वर के कहने पर आयशा से शादी करी जो ना कोई गुलाम थी ना बेवा , और इनसे शादी करने का उद्देश्य ये था के आयेशा की बुद्धि तेज़ थी जो इस्लाम को फायदा पंहुचा सकती हैं और बाद में ऐसा ही हुआ पैगम्बर मुहम्मद की बहुत सारी बातें उन्होंने दूसरे लोगो तक पहुचायी और सबसे ज़्यादा उन्ही से पैगम्बर मुहम्मद की हदीस (बाते ) मिलती हैं।

पैगम्बर मुहम्मद ईश्वर के द्वारा भेजे गए थे जो लोगो को सही रास्ता दिखाने के लिए आये थे इसमें औरते भी शामिल थी जिन्हे सही तरीका बताना था , तो जब कोई ऐसी बात होती जो औरतो से मिलती हुई होती तो पैगम्बर मुहम्मद अपनी बीवियों से कहते और उनकी बीविया दूसरी औरतो से कहती।

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब का क्या उद्देश्य था ?

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब का उद्देश्य लोगो को एक ईश्वर की तरफ ला कर उसकी प्रार्थना करवाना था , और लोगो के अंदर अच्छाई पैदा करवाना था , पैगम्बर मुहम्मद साहब के आने से पहले लोगो के दर्मिया एक दूसरे की जान लेना बहुत आसान था और बढ़ा कबीले वाला आदमी छोटे क़ाबिले वालो को धमकाता था , गुलाम को जानवर से बदतर रखा जाता था। और अगर किसी के यहाँ कोई लड़की पैदा हो जाती तो उसे ज़िंदा गाढ़ दिया जाता था , औरतो के साथ बुरा व्यव्हार किया जाता था। शराब जुवा , चोरी , लूत , डकैती आम थी।
लेकिन जब पैगम्बर मुहम्मद साहब ने इस्लाम का प्रचार शुरू करा तो उन्होंने इन सभी कामो पर रोक लगाई और ईश्वर के कहने पर हर बुरे काम की उसके उस बुरे काम के अनुसार सज़ा रखी , और उनके मानने वालो को आदेश दिया की जो भी यह बुरा काम करेगा उसे ऐसी सजा दी जाएगी , और देखते ही देखते पुरे अरब में सुकून शांति फेल गयी। और इस्ला की वह पर जीत हो गयी केवल बीस ही सालो में।

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब ने आयशा से शादी क्यों करी ?

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब ने आयशा से शादी करी क्योकि ऐसा करने का उन्हें ईश्वर ने कहा था और आयशा की बुद्धि बहुत तेज़ थी। उन्हें बहुत बाते जल्दी समझ आ जाती थी और वह समझाती भी बहुत अच्छे से थी। और पैगम्बर मुहम्मद शब् की बहुत सारी हदीसे उन्होंने औरतो तक पहुंचे पैगम्बर मुहम्मद बहुत शरमाते थे , पैगम्बर मुहम्मद के पास जब कोई ईश्वर की बात आती जो औरतो से जुड़ी हुई होती तो वह बाते अपनी बीवियों को बताते और उनकी बीविया दूसरी औरतो को।

क्या बाइबिल में हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब का नाम हैं ?

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब का नाम बाइबिल में बहुत बार आया हैं और उसमे उनका नाम अहमद आया हैं , और सिर्फ बाइबिल में नहीं बहुत सरे किताबो में पैगम्बर मुहम्मद का नाम आया हैं और पैगम्बर मुहम्मद से पहले जितने भी ईश्वर के दूत गुज़रे हैं सभी ने पैगम्बर मुहम्मद के बारे में खबर दी है ईश्वर के कहने पर क्योकि जो भी दूत आता हैं वह वही करता और कहता हैं जो ईश्वर उसे कहने के लिए कहता हैं , वह अपनी मर्ज़ी से कुछ नहीं कहता। जैसे इनके आने की खुशखबरी पैगम्बर ईसा , मूसा, और भी दूसरे पेगम्बरों ने दी।

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब किसकी नसल में से थे।

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब पैगम्बर इब्राहिम के बेटे इस्माइल पैगम्बर की नसल में से थे।

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब की मृत्यु कब हुई ?

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब की मृत्यु 632 ईस्वी (11 हिजरी ) में 63 साल की उम्र में बीमारी से हुई।

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब कितने साल मक्का में रहे

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब 13 साल मक्का में रहे , लेकिन जब मुसलमानो के उप्पर वहाँ के लोगो ने ज़्यादा ज़ुल्म करने लगे और मुसलमानो को सताने लगे तब ईश्वर ने पैगम्बर मुहम्मद को आदेश दिया तो उन्होंने पहले अपने साथियो को धीरे धीरे यथ्रीब ( अब मदीना )में भेजना शुरू करा और सबसे आखरी में खुद निकले अपने साथी अबू बक्र के साथ।

क्या हज़रत मुहम्मद पैगम्बर बलात्कारी थे ?

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर साहब और इस्लाम को बदनाम करने वाले लोग पैगम्बर मुहम्मद साहब पर इल्ज़ाम लगाते हैं के पैगम्बर मुहम्मद बलात्कारी थे हालाँकि यह एक झूठ और इलज़ाम के अलावा कुछ नहीं पैगम्बर मुहम्मद ने जहा भी शादी करी वह ईश्वर के कहने पर करी और पैगम्बर मुहम्मद ने अपनी पहली शादी 40 साल की खदीजा से करी जब के उनकी उम्र 25 साल की थी और जब तक खदीजा ज़िंदा थी पैगम्बर मुहम्मद ने कोई दूसरी शादी नहीं करी और उन्हें सबसे ज़्यादा प्यार खदीजा से था खदीजा की मृत्यु के बाद भी।पैगम्बर मुहम्मद साहब ने जितनी भी औरतो से शादी करी वह यातो विधवा थी या गुलाम थी और वह अपनी सभी बीवियों में न्याय करते थे।

हज़रत मुहम्मद पैगम्बर के प्रसिद्ध उद्धरण(quotes) कौन से हैं ?

माता – पिता का अपने बच्चो को अच्छे संस्कार के से बड़ा कोई उपहार नहीं दे सकते।
जो तुम अपने लिए पसंद करते हो वह अपने भाई के लिए भी पसंद करो।
अपने माता – पिता के सामने उफ़ तक ना कहो।
कभी अपने साथी के कष्टों पर प्रसन्नता व्यक्त ना करो , क्योकि ईश्वर उसे उनसे मुक्त कर सकता हैं , और आपको कष्ट दे सकता हैं।
भुको को खाना खिलाओ जिन्हे आप जानते हैं उन्हें भी और उन्हें भी जिन्हे आप नहीं जानते सलाम करो।
जो लोगो का आभारी नहीं वह लोगो का आभारी नहीं।

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