नमामि गंगे योजना क्या है, कब शुरू हुई | Namami Gange Yojana kya hai in Hindi

नमामि गंगे योजना क्या है, कब शुरू हुई | Namami Gange Yojana kya hai in Hindi

नमामि गंगे योजना क्या है, कब शुरू हुई | Namami Gange Yojana kya hai in Hindi

नमामि गंगे योजना क्या है, कब शुरू हुई | Namami Gange Yojana kya hai in Hindi – तो दोस्तों आज हम बात करेंगे इस आर्टिकल में नमामि गंगे योजना के बारे में और जानने की कोशिश करेंगे कि ये नमामि गंगे योजना है क्या और इस नमामि गंगे योजना को कब और क्यों शुरू किया गया था तथा इस नमामि गंगे योजना के लाभ क्या है और इस नमामि गंगे योजना के उद्देश्य क्या है। तो दोस्तों अगर आप भी इस नमामि गंगे योजना के बारे में जानने के इच्छुक है , तो फिर हमारे साथ इस आर्टिकल के आखिर तक बने रहिए ताकि आपके ज्ञान में और भी ज्यादा वृद्धि हो और आप कुछ नया सीख सकें और अपने इस ज्ञान का सही जगह इस्तेमाल कर सकें। तो चलिए दोस्तों अब हम इस नमामि गंगे योजना के बारे में जानने की कोशिश करते है कि ये नमामि गंगे योजना है क्या और इस नमामि गंगे योजना को कब और क्यों शुरू किया गया था तथा इस नमामि गंगे योजना के लाभ क्या है और इस नमामि गंगे योजना के उद्देश्य क्या है :-

नमामि गंगे योजना क्या है ?

नमामि गंगे योजना एक ऐसी योजना है जिसमें गंगा नदी को प्रदूषित होने से रोकना है और गंगा नदी में जो प्रदूषण पहले से मौजूद है उस प्रदूषण को समाप्त करना है तथा इससे नदियों को पुनः जीवित करने के लिए इस नमामि गंगे योजना को शुरू किया गया है। इस नमामि गंगे योजना की तरह केंद्र सरकार के द्वारा ऐसी बहुत सी योजनाए चलाई जा रही जिसके तहत गंगा को साफ किया जा सकें और नदी के साथ-साथ विभिन्न जगह पर पानी के साफ करने का भी काम रहा है तथा गंगा नदी से लगे हुए जितने भी शहर और गांव है उनमें विकास का कार्य किया जा रहा है। लेकिन इस नमामि गंगे योजना को एक बहुत बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने अनुसार 305 परियोजनाओं की अनुमति लागत के लिए 28,613.75 करोड़ों रुपए का बिल पास कर लिया गया है और इन 305 परियोजनाओं में से 109 परियोजनाओं को पूरा कर लिया गया है। जबकि बाकी बची परियोजनाओं का किसी ना किसी स्तर पर काम चल रहा है।

नमामि गंगे योजना कब और क्यों शुरू की गई ?

हमारे भारत देश की सरकार ने गंगा नदी से प्रदूषण को समाप्त करने के लिए और गंगा नदी को पुनः जीवित करने के लिए इस नमामि गंगे योजना का शुभारंभ किया है। इस नमामि गंगे योजना के तहत गंगा नदी का गोमुख से लेकर हरिद्वार के बीच का फासला लगभग 405 किलोमीटर है। तो सीधा सा मतलब है कि गंगा नदी 405 किलोमीटर का सफर तय करती है और अपने किनारे पर बसे 15 शहर एवं 132 गांव से होकर के गुजरती है। अब इन 15 शहर एवं 132 गांव से निकलने वाले कूड़ा करकट ने गंगा नदी के करोड़ों लीटर पानी को गन्दा कर दिया है। इस नमामि गंगे योजना को सन 2017 को प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में प्रारम्भ किया गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया है कि सन 2020 तक गंगा नदी की सफाई 70 से 80% पूरी हो चुकी है।

नमामि गंगे योजना की कुछ सामान्य जानकारी

Scheme name ( योजना का नाम )नमामि गंगे योजना।
Who started ( किसने आरंभ की )केन्द्र सरकार के द्वारा।
Beneficiary ( लाभार्थी )हमारे भारत देश की सबसे ज्यादा मान्यता वाली नदी :- गंगा नदी।
Purpose ( उद्देश्य )इस नमामि गंगे योजना का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी को प्रदूषण से बचाना है और गंगा नदी में पहले से मौजूद प्रदूषण को ख़त्म करना है।
Official website ( आधिकारिक वेबसाइट )दी गई इस लिंक :- click here पर क्लिक करें।
Year ( साल )2022
Application Type ( आवेदन का प्रकार )———
State ( राज्य )भारत के पांच राज्यों में इस नमामि गंगे योजना को शुरू किया गया है :- उत्तर प्रदेश , झारखण्ड राज्य , उत्तराखंड राज्य , बिहार राज्य , पश्चिम बंगाल।

नमामि गंगे योजना के लाभ

इस नमामि गंगे योजना के निम्न फायदे ( लाभ ) है जिन्हे हमने एक लिस्ट के माध्यम से नीचे कि ओर दर्शाए है , तो दोस्तों आईये जानते है कि इस नमामि गंगे योजना के आखिर कौन-कौन से फायदे ( लाभ ) है :-

  • इस नमामि गंगे योजना के तहत 32 परियोजनाओं में से 871.74 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली 20 परियोजनाएँ सीवर की स्वच्छता तथा उत्तराखंड के विभिन्‍न भागों में सफाई के कार्यों के निर्माण से संबंधित हैं।
  • इस नमामि गंगे योजना के अंतर्गत सभी परियोजनाओं के पूरे होने के बाद हरिद्वार और ऋषिकेश समेत उत्तराखंड के सभी प्रमुख शहरों का पानी बिना स्वच्छ हुए गंगा में नहीं जाएगा।
  • इस नमामि गंगे योजना के माध्यम से छह परियोजनाएँ हरिद्वार में लागू की जाएंगी। इस नमामि गंगे योजना के अंतर्गत जगजीतपुर और सराय में दो एसटीपी का निर्माण किया जाएगा। हरिद्वार की परियोजनाओं की कुल लागत 414.20 करोड़ रुपए रखी गई है।
  • इस नमामि गंगे योजना के अंतर्गत टिहरी गढ़वाल , रुद्र प्रयाग और चमोली में घाट विकास कार्यों के लिये आधारशिलाएं रखी गईं।
  • इस नमामि गंगे योजना के तहत और भी ज्यादा सीवरेज स्वच्छता परियोजनाओं की आधारशिलाएँ रखी गईं जैसे कि :- उत्तरकाशी , मुनि की रेती , कीर्ति नगर , श्रीनगर , रुद्र प्रयाग , बद्रीनाथ , जोशीमठ , चमोली , नंद प्रयाग और कर्ण प्रयाग आदि में।

नमामि गंगे योजना के उद्देश्य

इस नमामि गंगे योजना का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी को प्रदूषण से बचाना है और गंगा नदी में पहले से मौजूद प्रदूषण को ख़त्म करना है। इस नमामि गंगे योजना के माध्यम से छह परियोजनाएँ हरिद्वार में लागू की जाएंगी। इस नमामि गंगे योजना के अंतर्गत जगजीतपुर और सराय में दो एसटीपी का निर्माण किया जाएगा। हरिद्वार की परियोजनाओं की कुल लागत 414.20 करोड़ रुपए रखी गई है। इस नमामि गंगे योजना के अंतर्गत सभी परियोजनाओं के पूरे होने के बाद हरिद्वार और ऋषिकेश समेत उत्तराखंड के सभी प्रमुख शहरों का पानी बिना स्वच्छ हुए गंगा में नहीं जाएगा।

यह भी पढ़े:

इस नमामि गंगे योजना को क्यों शुरू किया गया था ?

इस नमामि गंगे योजना के तहत गंगा नदी का गोमुख से लेकर हरिद्वार के बीच का फासला लगभग 405 किलोमीटर है। तो सीधा सा मतलब है कि गंगा नदी 405 किलोमीटर का सफर तय करती है और अपने किनारे पर बसे 15 शहर एवं 132 गांव से होकर के गुजरती है। अब इन 15 शहर एवं 132 गांव से निकलने वाले कूड़ा करकट ने गंगा नदी के करोड़ों लीटर पानी को मेला कर दिया है। हमारे भारत देश की सरकार ने गंगा नदी से प्रदूषण को समाप्त करने के लिए और गंगा नदी को पुनः जीवित करने के लिए इस नमामि गंगे योजना की शुरूआत की गई है।

इस नमामि गंगे योजना को कब प्रारम्भ किया गया था ?

इस नमामि गंगे योजना को सन 2017 को प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में प्रारम्भ किया गया था।

ये नमामि गंगे योजना क्या है ?

नमामि गंगे योजना एक ऐसी योजना है जिसमें गंगा नदी को प्रदूषित होने से रोकना है और गंगा नदी में जो प्रदूषण पहले से मौजूद है उस प्रदूषण को समाप्त करना है तथा इससे नदियों को पुनः जीवित करने के लिए इस नमामि गंगे योजना को शुरू किया गया है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *