Nai Arthik Niti Kya Hai Aur Iski Visheshtaen Kya Hai - Vivechna Karen

Nai Arthik Niti Kya Hai Aur Iski Visheshtaen Kya Hai – Vivechna Karen

Nai Arthik Niti Kya Hai Aur Iski Visheshtaen Kya Hai – Vivechna Karen

Nai Arthik Niti Kya Hai Aur Iski Visheshtaen Kya Hai – Vivechna Karen – तो दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपको नई आर्थिक नीति के बारे में बताने वाले है इसकी विशेषताएं और उद्देश्य क्या है सभी के बारे में हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जानकारी प्रदान करने वाले तो आर्टिकल पूरा ध्यान से पढ़िए ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी मिल सके तो आइये जानते है,

Nai Arthik Niti Kya Hai l नई अर्थिक नीति क्या है ?

1990 के दशक में भारत सरकार ने आर्थिक संकट से बाहर निकलने के क्रम में अपनी पुरानी आर्थिक नीतियों से विचलित एवं निजीकरण की दिशा में सीखने का फैसला करा एवं अपनी नई आर्थिक नीतियों को एक के बाद एक घोषित करना शुरू कर दिया। आगे चलकर इन नीतियों के अच्छे परिणाम देखने को मिले तथा भारत के आर्थिक इतिहास में ये नीतियाँ मील के पत्थर सिद्ध हुईं। उस दौरान पी वी नरसिंह राव भारत के प्रधानमंत्री थे एवं मनमोहन सिंह वित्तमंत्री थे। इससे पूर्व में देश एक गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा था एवं इसी संकट ने भारत के नीति निर्माताओं को नई आर्थिक नीति को लागू करने के लिए मजबूर कर दिया था । संकट से उत्पन्न हुई स्थिति ने सरकार को मूल्य स्थिरीकरण एवं संरचनात्मक सुधार लाने के उद्देश्य से नीतियों का निर्माण करने के लिए प्रेरित करा। स्थिरीकरण की नीतियों का मुख्य उद्देश्य कमजोरियों को ठीक करना था, जिससे राजकोषीय घाटा एवं विपरीत भुगतान संतुलन को ठीक करा जा सके।

नई आर्थिक नीति के तीन प्रमुख तत्व थे।

  • उदारीकरण
  • निजीकरण
  • वैश्वीकरण।

नई आर्थिक नीति के मुख्य उद्देश्य l

वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह के जरिये नई आर्थिक नीति को शुरू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य थे, जो की इस प्रकार है।

  • भारत की अर्थव्यवस्था को ‘वैश्वीकरण’ के मैदान में उतारने के साथ-साथ इसे बाजार के रूख के अनुरूप बनाना।
  • मुद्रास्फीति की दर को नीचे लाना एवं भुगतान असंतुलन को दूर करना।
  • आर्थिक विकास की दर को बढ़ाना तथा विदेशी मुद्रा के पर्याप्त भंडार का निर्माण करना।
  • आर्थिक स्थिरीकरण को प्राप्त करने के साथ-साथ सभी तरह के अनावश्यक आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना। अर्थव्यवस्था के लिए मार्किट के अनुरूप एक आर्थिक परिवर्तिन लाना।
  • प्रतिबंधों को हटाकर, माल, सेवाओं, पूंजी, मानव संसाधन तथा प्रौद्योगिकी के अन्तरराष्ट्रीय प्रवाह की अनुमति देना।
  • अर्थव्यवस्था के सारे क्षेत्रों में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना। इसी कारण सरकार के लिए आरक्षित क्षेत्रों की संख्या घटाकर तीन कर दी गई।

नयी आर्थिक नीति 1991 की विशेषताएं इस प्रकार हैं।

  • सिर्फ 6 उद्योगों लाइसेंस योजना के अंतर्गत रखा गया था।
  • निजी क्षेत्र के लिए प्रवेश। सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका सिर्फ चार उद्योगों तक ही सीमित था; बाकी सारे उद्योगों को भी निजी क्षेत्र के लिए खोल दिए गए थे।
  • विनिवेश कई सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में बाहर करा गया था।
  • विदेश नीति के उदारीकरण। विदेशी इक्विटी की सीमा कई गतिविधियों में 100 प्रतिशत करने के लिए उठाया गया था , यानि NRI एवं विदेशी निवेशकों को भारतीय कंपनियों में निवेश करने की अनुमति दी गई।
  • तकनीकी क्षेत्र में उदारीकरण। स्वत: अनुमति विदेशी कंपनियों के साथ में प्रौद्योगिकी समझौतों पर हस्ताक्षर करने के लिए भारत की कंपनियों को दिया गया था।
  • विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) की स्थापना करना। इस बोर्ड को बढ़ावा देने एवं भारत में विदेशी निवेश लाने के लिए स्थापित करा गया था।
  • लघु उद्योग की स्थापना करना। विभिन्न लाभ लघु उद्योगों को देने की पेशकश कर रहे थे।

उदारीकरण

उदारीकरण 1991 भारतीय कंपनियों में निम्नलिखित तरीके से उदारीकरण से पहले उद्योगों पर डाल दिया गया है, जो लाइसेंस , कोटा तथा कई ओर अधिक प्रतिबंध एवं नियंत्रण का अंत करने के लिए संदर्भित करता है। ,

  • कुछ को छोड़कर लाइसेंस का उन्मूलन।
  • व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार या संकुचन पर कोई भी प्रतिबंध नहीं है।
  • कीमतें तय करने में स्वतंत्रता।
  • आयात एवं निर्यात में उदारीकरण।
  • माल तथा सेवाओं के आंदोलन में स्वतंत्रता
  • माल तथा सेवा की कीमतें तय करने में स्वतंत्रता

निजीकरण

निजीकरण निजी क्षेत्र को बड़ी भूमिका देने एवं सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को कम करने के लिए संदर्भित करता है। निजीकरण सरकार की नीति पर अमल करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए, जो की इस प्रकार है।

  • सार्वजनिक क्षेत्र, यानी निजी क्षेत्र के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के हस्तांतरण का विनिवेश
  • औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्निर्माण (BIFR) के बोर्ड की स्थापना करना। इस बोर्ड को नुकसान, पीड़ित सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में बीमार इकाइयों को पुनर्जीवित करने के लिए स्थापित करा गया था।
  • सरकार की हिस्सेदारी के कमजोर पड़ने। विनिवेश के लिए निजी क्षेत्र की प्रक्रिया में 51 प्रतिशत से अधिक शेयरों का अधिग्रहण तो यह निजी क्षेत्र के लिए स्वामित्व एवं प्रबंधन के हस्तांतरण में ये परिणाम है।

वैश्वीकरण

ये दुनिया के विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं के एकीकरण के लिए संदर्भित करता है। 1991 तक भारत सरकार ने आयात एवं आदि का आयात टैरिफ , प्रतिबंध के लाइसेंस के लिए, पर नई नीति सरकार निम्नलिखित उपायों के जरिये वैश्वीकरण की नीति अपनाई के बाद इस संबंध में विदेशी निवेश के संबंध में सख्त नीति का पालन करा गया था।

  • आयात उदारीकरण। सरकार पूंजीगत वस्तुओं के आयात से कई प्रतिबंध हटा दिए।
  • विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (फेरा) विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के जरिये बदल दिया गया था। (फेमा)
  • टैरिफ संरचना का युक्तिकरण
  • निर्यात शुल्क के उन्मूलन।
  • आयात शुल्क में कमी।

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नई आर्थिक नीति क्या है और इसकी विशेषताएं ?

नई आर्थिक नीति 1991 की विशेषताएं इस प्रकार हैं’ सिर्फ 6 उद्योगों लाइसेंस योजना के तहत रखा गया था। निजी क्षेत्र के लिए प्रवेश। सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका सिर्फ चार उद्योगों तक ही सीमित था; बाकी सारे उद्योगों को भी निजी क्षेत्र के लिए खोल दिए गए थे।

नई आर्थिक नीति के लेखक कौन है?

व्लादिमीर इलिच लेनिन (1870-1924) ने नई आर्थिक नीति आरम्भ की थी।

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