Mahila Samakhya Yojana kya hai in Hindi | महीला सामाख्या योजना क्या है ?

Mahila Samakhya Yojana kya hai in Hindi | महीला सामाख्या योजना क्या है ?

Mahila Samakhya Yojana kya hai in Hindi | महीला सामाख्या योजना क्या है ?

Mahila Samakhya Yojana kya hai in Hindi | महीला सामाख्या योजना क्या है ? – आज हम इस आर्टिकल महीला सामाख्या योजना क्या है इस बारे में करेंगे और जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर इस महीला सामाख्या योजना के क्या उद्देश्य है और इस महीला सामाख्या योजना के क्या लाभ है तो दोस्तों अगर आप भी इस महीला सामाख्या योजना के बारे में जानने के इच्छुक है तो हमारे साथ इस आर्टिकल के आखिर तक बने रहिएगा ताकि आपके ज्ञान में और भी ज्यादा वृद्धि हो , तो दोस्तों आईये जानने की कोशिश करते है कि ये महीला सामाख्या योजना आखिर है क्या :-

महीला सामाख्या योजना क्या है ?

तो दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इस महिला सामाख्या योजना की शुरुआत साल 1989 में हुई थी जब इसकी शुरुआत हुई थी तब भी महिलाओं की स्थिति और भी ज्यादा खराब थी। इस महिला सामाख्या योजना को वैकल्पिक शिक्षण केंद्रों आवासीय शिविरों और प्रारंभिक विकास केंद्रों के गठबंधन के माध्यम से देश के कल्चर से संबंधित कर रखा है और आज यह महिला सामाख्या योजना झारखंड और बिहार सहित देश के 9 राज्यों के 12000 गांव और 6 जिलों में फैली हुई है इस महिला समाख्या योजना का काम शिक्षा में लैंगिक समानता के विचार के इर्द-गिर्द काम करना है महिला सामाख्या योजना केंद्र सरकार की शिक्षा विभाग , विश्व बैंक सहित और कई अन्य लोगों द्वारा आयोजित।

जैसा कि आज हर कोई जानता है कि महिलाओ के लिए शिक्षा के अवसरों का प्रबंधन करना आजादी के बाद से ही राष्ट्रीय प्रयास का विषय बना रहा है लेकिन इन प्रयासों के अच्छे परिणाम भी हम सबको मिलते रहे हैं फिर भी लिंग असमानताओ की भावना ग्रामीण व वंचित समुदायों में आज भी पाई जाती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 से संशोधित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1992 तक में भी लिंग असमानता की इस भावना को देखते हुए महिलाओं की प्रगति व उन्हें शिक्षित करने की दिशा में कई योजनाएं बनाई गई और प्रारंभ की गई। उन्हीं में से भारत सरकार की एक बहु चर्चित व महत्वपूर्ण योजना यह थी कि न्यू राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1946 में मौजूद है , यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और लड़कियों के उन्नयन पर केंद्रीय थी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समानता का अधिकार प्राप्त कराने और महिलाओं को सशक्त बनाना है , इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु महिला सामाख्या की योजना को नए तरीके से विचार करके उपागम को अपनाया गया जो केवल उद्देश्यों की पूर्ति के बजाय काम करने पर जोड़ देता था। महिला समर्थक योजना में शिक्षा को केवल आधारिक साक्षरता कौशल हेतु नहीं समझा जाता था बल्कि इसके प्रश्नों को समझाने की प्रक्रिया के रूप में भी दिया जाता था।

महीला सामाख्या योजना के उद्देश्य और लाभ क्या है ?

महीला सामाख्या योजना के निम्न उद्देश्य और लाभ है , तो आइए जानने की कोशिश करते है कि वो उद्देश्य और लाभ क्या है :-

  • इस महीला सामाख्या योजना के तहत महिलाओ के आत्मसम्मान व आत्मविश्वास में वृद्धि करना ताकि वे उत्पादकों व कार्यकत्ताओं के रूप में अर्थव्यवस्था में अपने योगदान को दे सकें व इसके लिए उन्हें शैक्षिक कार्यक्रमों में भाग लेने हेतु प्रोत्साहित करना भी उद्देश्य है। इस से महिलाओ को बहुत लाभ होगा।
  • इस महीला सामाख्या योजना से एक ऐसा वातावरण निर्मित करना जिसमें शिक्षा द्वारा महिलाओं की क्षमता के उद्देश्यों की पूर्ति हो सके।
  • ये महीला सामाख्या योजना जिला स्तर व महिला संघों द्वारा विकसित निर्णय शक्ति की क्षमताओं के आधार पर प्रबन्धन के एक विकेन्द्रित व सामूहिक स्थिति को स्थापितकरती है , जिससे कि प्रभावी सहभागिता हेतु आवश्यक स्थितियों का निर्माण हो सके।
  • ये महीला सामाख्या योजना एक ऐसा वातावरण निर्मित करती है , जहाँ महिलायें ज्ञान व सूचना प्राप्त कर व सशक्तत बनकर , स्वयं के समाज के विकास हेतु सकारात्मक भूमिक निभा सके।
  • इस महीला सामाख्या योजना के अंतर्गत औपचारिक व अनौपचारिक शिक्षा कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में महिलाओं के भाग लेने हेतु आवश्यक परिस्थितियों का निर्माण करना।
  • ये महीला सामाख्या योजना वर्तमान समय में यह उत्तर प्रदेश के 33 जिलों में 5,287 गाँवों उत्तरांचल , कुर्नाटक , गुजरात , आन्ध्र प्रदेश व केरल में क्रियान्वित की जा रही हैं। दसवीं योजना के दौरान इस योजना को ऐसे 27 नये जिलों तक विस्तार देने की योजना हैं जो विशेषता शैक्षिक व सामाजिक दृष्टि से पिछड़े राज्य हैं जैसे :- बिहार , झारखण्ड , असम , उत्तर प्रदेश , उत्ताखण्ड , कर्नाटक आदि के पिछड़े क्षेत्र।
  • इस महीला सामाख्या योजना के अंतर्गत महिलाओं व किशोरियों को आवश्यक समर्थन प्रदान करना व शिक्षा के समुचित अवसरों हेतु अनौपचारिक रूप से सीखने का एक वातावरण प्रदान करना।
  • इस महीला सामाख्या योजना के तहत महिला संघों को तत्परतापूर्वक व सहयोगपूर्वक गाँव में चलने वाली विभिन्ना शैक्षिक गतिविधियों पर नजर रखने हेतु बनाना जिसमें प्राथमिक विद्यालय केन्द्र व सतत शिक्षा केन्द्र अपने कार्यों को भलि-भाँति संपादित करते रहें।

महीला सामाख्या योजना के अंतर्गत

ये योजना इस महिला सामाख्या योजना के द्वारा विभिन्न पहलुओं व समस्याओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन करके समाधान खोजा जाता था। यह कार्यक्रम महिलाओं हेतु ऐसा वातावरण निर्मित करती थी ताकि वे अपनी गति के अनुसार शिक्षा के अपनी प्राथमिकताओं का निर्धारण स्वयं कर सके और वंचित चयन हेतु ज्ञान व सूचना को प्राप्त कर सके यह कार्यक्रम विशेष रूप से सामाजिक रुप से वंचित तथा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही महिलाओं के स्वयं के प्रति इस धरणा में बदलाव लाता है कि किसी भी तरह से अन्य महिलाओं से हम भी कम नहीं है क्योंकि इस योजना के द्वारा महिलाओं को अपनी समस्या से निपटना और आत्मविश्वास की कमी को दूर करते हुए जीवन के लिए संघर्ष करना सिखाया जाता है इसके लिए ज्ञान प्रदान करने का भी प्रयास किया जाता है।

इस महिला सामाख्या योजना के तहत ये महिलाये संघ आकार व स्वरूप में अलग होते हुए भी अपनी विविध समस्याओं का सामुदायिक रूप से हल निकाल लेते हैं। यह योजना केवल एक नीलपत्र योजना मात्र नहीं हैं , बल्कि इस में कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु एक-एक व्यापक रूप से सारी रेखा तैयार की गई हैं। मुख्यतः यह योजना महिलाओं को उनकी समस्याओं की सामूहिक कार्यवाही हेतु जमा करती हैं और उन्हें विविध पहलुओं के बारे में जानकारी देकर सशक्त बनाती हैं। सामूहिक रूप से कार्य करने हेतु तत्पर होते हैं , जैसे-जैसे ये संघ सशक्त व परिपक्व होते जाते हैं , वे सामूहिक रूप में जिला व राज्य स्तर पर भी संघों का निर्माण कर अपनी क्रियाओं को अच्छा करते रहते हैं जैसे-जैसे यह योजना अपने उद्देश्य की प्राप्ति हेतु आगे बढ़ती हैं। सशक्तिकरण की यह नीवं एकजुट महिला संगठनों (महिलाओं समुदायों) द्वारा बहुत गहराई से रखी जाती हैं।

महीला सामाख्या योजना की क्या-क्या मान्यताएँ है

इस महीला सामाख्या योजना की निम्न मान्यताएँ है , तो आइए जानने की कोशिश करते है कि वो कौन-कौन सी मान्यताएँ है :-

  • सभी ग्राम्य स्तर पर महिला व महिला समूहों का अपनी गति प्राथमिकताओं , स्वरूप व सभी योजनाओं की वस्तुस्थिति को निर्धारण करना चाहिए।
  • सभी परियोजना कर्मियों को निर्देशक की भूमिका की बजाय सुविधा प्रदाता व सहायक की भूमिका निभानी चाहिए।
  • प्रबन्धन ढाँचे के विकेन्द्रीकृत होने के साथ ही जिला, ब्लाक व ग्राम स्तर पर अपनी शक्तियों व जिम्मेदारियों को सामूहिक रूप से पूरा करने के लिए कटिबद्ध होना चाहिए।
  • योजना में प्रत्येक घटक व गतिविधि द्वारा ज्ञान का वातावरण स्थापित होना चाहिए, योजना की हर गतिविधि द्वारा महिला को स्वयं के अनुभव व उनकी शक्तियों का एहसास कराया जाना चाहिए। संघ में प्रत्येक महिला की व्यक्तिगत व विभिन्ना सोच को बराबरी का स्थान व सम्मान दिया जाना चाहिए।
  • इस योजना कार्यक्रम के अन्दर सभी प्रक्रियायें , महिलाओ के वर्तमान ज्ञान , अनुभव व कौशल के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए।
  • आयोजन, निर्णय प्रक्रिया व मूल्यांकन क्रियाओं के रूप में भी सभी स्तर के कर्मियों को ग्राम्य स्तर पर सामूहिक रूप से जवाबदेह रहना चाहिए।
  • परियोजना के सभी सदस्य हर स्तर पर निर्धन महिलाओं के लिए जाति / समुदाय व अन्य पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर कार्य करें अतः इसके लिए एक सहभागी चयन प्रक्रिया अपनायी जायें।

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