कानून के समक्ष समानता क्या है | Kanoon Ke Samksh Samanta kya hai

कानून के समक्ष समानता क्या है | Kanoon Ke Samksh Samanta kya hai

कानून के समक्ष समानता क्या है | Kanoon Ke Samksh Samanta kya hai

कानून के समक्ष समानता क्या है | Kanoon Ke Samksh Samanta kya hai – तो दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल में कानून से सम्बन्धित जानकारी प्रदान करेंगे और जानने की कोशिश करेंगे की इस कानून के समक्ष समानता का क्या अर्थ होता है और ये कानून के समक्ष समानता आखिर में है क्या तथा इस कानून के समक्ष समानता में कौन-कौन से अधिकार होते है। हाँ तो दोस्तों अगर आप भी इस कानून के समक्ष समानता के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो फिर आप सब बने रहे हमारे साथ इस आर्टिकल के अंत तक :- कानून के समक्ष समानता क्या है | Kanoon Ke Samksh Samanta kya hai | कानून के समक्ष समानता क्या है | Kanoon Ke Samksh Samanta kya hai

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कानून के समक्ष समानता क्या है | Kanoon Ke Samksh Samanta kya hai?

कानून के समक्ष समानता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 11 में कानून के समक्ष समानता का अधिकार की विवेचना की गई है अनुच्छेद 11 के अनुसार राज्य किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता तथा कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं कर सकता है। कानून के समक्ष समानता का आशय यह है कि कानून की नजर में सभी व्यक्ति समान होंगे। जन सामान्य को साधारण विधि तथा प्रशासकीय कर्मचारियों को प्रशासकीय विधि से नियंत्रित किया जाता है। कानून के समान संरक्षण का आरोप है कि समान स्थितियों में सबके साथ समान व्यवहार किया जाए तथा प्रत्येक व्यक्ति कानून के समक्ष समान है और किसी भी व्यक्ति को कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं कर सकता है।

विधि या कानून के समक्ष समानता का अधिकार एक नकारात्मक अवधारणा है जिसका आशय है कि किसी व्यक्ति को विशेष अधिकार नहीं दिए गए हैं और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का सकारात्मक पक्ष है कि किसी भी व्यक्ति को समान संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता है, जिसका आशय है कि प्रत्येक व्यक्ति के साथ सभी समान परिस्थितियों में समान व्यवहार किया जाता है।

कानून के समक्ष समानता का अर्थ | Meaning of equality before the law

तो दोस्तो हम आपको बताते चलें कि कानून के समक्ष समानता का आशय यह नहीं है कि सभी कि सभी व्यक्ति बिल्कुल एक समान है या व्यक्तियों के समक्ष जो असमानता नहीं थे उसे समाप्त कर लिया जाए बल्कि समानता का आशय यह है कि जिन व्यक्तियों की परिस्थितियां एक समान है उनके साथ एक जैसा व्यवहार किया जाए। लेकिन अन्य शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि समान व्यक्तियों के लिए समान कानून होना चाहिए परंतु इसका आशय यह भी नहीं है कि सभी व्यक्तियों के लिए एक ही कानून है इसका वास्तविक आशय यह है कि समाज के विभिन्न श्रेणियों के लिए भिन्न-भिन्न कानून हो सकते हैं।

कानून में समानता का अधिकार | Right to Equality in Law

भारतीय कानून में समानता का अधिकार निम्न लिखित आज्ञया प्रदान करता है, जिसे हमने आपकी सुविधा के लिए नीचे की ओर प्रदर्शित किया है :-

  1. कानून की दृष्टि से भिन्न-भिन्न वर्गों के व्यक्तियों के लिए अलग-अलग वर्गीकरण किया जा सकता है।
  2. कुछ विशेष प्रकार के अपराधों पर मुकदमा चलाने के लिए विशेष अदालतों का भी गठन किया जा सकता है।
  3. कुछ विशेष व्यक्तियों को विशेष परिस्थितियों में विशेष अधिकार दिए जा सकते हैं।

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