Jallianwala Bagh Hatyakand in Hindi Mein Kab Hua Tha Our Kahan Hua Tha

Jallianwala Bagh Hatyakand in Hindi Mein Kab Hua Tha Our Kahan Hua Tha

Jallianwala Bagh Hatyakand in Hindi Mein Kab Hua Tha Our Kahan Hua Tha

Jallianwala Bagh Hatyakand in Hindi Mein Kab Hua Tha Our Kahan Hua Tha – तो दोस्तों इस आर्टिकल में हम जलियावाला बाग हत्याकांड के बारे में बात करने वाले है। ये हत्याकांड कैसे हुआ था, क्यों हुआ था,कब हुआ था और इस हत्याकांड में कौन लोग शामिल थे। सब के बारे में इस आर्टिकल में हम आपको पूरी जानकारी प्रदान करने वाले है तो आर्टिकल को ध्यान से पढ़िए जिससे आपको इस घटना के बारे में पूरी जानकारी मिल सके।

Jallianwala Bagh Hatyakand in Hindi Mein Kab Hua Tha Our Kahan Hua Tha
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जलियावाला बाग हत्याकांड क्या है? Jallianwala Bagh Hatyakand Kya hai

जलियांवाला बाग हत्याकांड के 13 अप्रैल 2022 को बुधवार के दिन 103 साल पूरे हो गए हैं।” जलियावाला बाग हत्याकांड ” भारत के पंजाब राज्य के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के करीब स्थित जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी वाले दिन हुआ था। जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल 1919 के दिन औपनिवेशिक ताकतों की अंधाधुंध गोलीबारी में सैकड़ों लोगो की जाने गई थी। इस दिन रौलेट एक्ट का विरोध प्रदर्शन करने के लिए एक सभा आयोजित की गई थी, जिसमें जनरल डायर नामक एक अंग्रेज ऑफिसर ने उस सभा में आई भीड़ पर अंधाधुन गोलिया चलवा दीं, इस घटना में 350 से ज्यादा लोग मारे गए थे और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे।

जलियावाला बाग हत्याकांड कुछ इस तरह दिया गया था अंजाम

जिस समय की यह घटना है, उस समय अंग्रेजों ने उस वक्त होने वाली सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया था एवं नागरिकों को उनकी ‘अवज्ञा’ के लिए दंडित करने के लिए, ब्रिगेडियर-जनरल रेजिनाल्ड डायर ने उसकी सेना को उन हजारों निहत्थे भारतीयों की भीड़ में गोलीबारी करने का आदेश दिया था, ये सभी बैसाखी के त्योहार को मनाने के लिए एक साथ आए हुए थे, वे सभी इन बातों से अनजान थे कि वहां इतनी भारी मात्रा में गोलीबारी करी जा सकती है |

औपनिवेशिक सैनिकों ने पंजाब राज्य के अमृतसर में स्थित जलियांवाला बाग में प्रवेश करा तथा उनके पीछे मुख्य प्रवेश द्वार को अवरुद्ध कर दिया था ताकि यह सुनिश्चित करा जा सके कि भीड़ पर लगभग 10 मिनट तक गोलियां चलाने से पहले कोई वहा से भाग न सके। कई सारे लोग अपने आप को बचाने के लिए कुएं में कूद गए क्योंकि उन सैनिकों ने उन सभी लोगो पर गोलियां बरसाईं। जबकि अंग्रेजों के द्वारा जारी किये गए आधिकारिक आंकड़े ने यह दावा किया कि नरसंहार में 350 से ज्यादा लोग मारे गए थे। वहीं कांग्रेस पार्टी ने यह दावा किया कि ये आंकड़े 1,000 से अधिक थे। जनरल डायर, जिसकी ब्रिटेन के अंदर कुछ लोगों के द्वारा प्रशंसा की गई थी। लेकिन दूसरों के द्वारा इसकी आलोचना की गई थी। इस घटना के बाद जनरल डायर को उनके पद से हटाया गया था। उन्हें आगे भारत के अंदर तैनात करने से भी रोक दिया गया था।

इस नरसंहार के लिए माफी की बढ़ती मांग के बीच, पूर्व ब्रिटिश प्रधान मंत्री थेरेसा ने इस घटना पर अपना “खेद” व्यक्त किया। उन्होंने इस घटना को ब्रिटिश और भारतीय इतिहास पर एक “शर्मनाक निशान” कहा है, पर माफी मांगना बंद कर दिया। इस नरसंहार के 100 से अधिक वर्ष हो जाने के बाद 2019 में, भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त डॉमिनिक एस्क्विथ ने जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक का दौरा किया था और मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी थी। उस समय डॉमिनिक एस्क्विथ ने यह कहा था, आज से 100 साल पूर्व जलियांवाला बाग की घटनाएं ब्रिटिश-भारतीय इतिहास में एक शर्मनाक कृत्य को दर्शाती हैं। जो हुआ और जो दुख हुआ, उसके लिए हमें गहरा खेद है। मुझे आज इस बात की खुशी है कि यूके और भारत 21वीं सदी की एक संपन्न साझेदारी को और विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

रॉलेट एक्ट क्या था ? Rollet Act Kya tha ?

इस एक्ट के तहत ब्रिटिश सरकार के पास एक शक्ति थी जिसमे वह बिना कोई ट्रायल चलाए किसी भी संदिग्ध को गिरफ्तार कर सकती थी या फिर उसको जेल में डाल सकती थी। रोलेट एक्ट के माध्यम से पंजाब के दो मशहूर नेताओं डॉक्टर सत्यपाल एवं डॉ. सैफुद्दीन किचलू को गिरफ्तार करा गया था। इनकी गिरफ्तारी के विरोध में कई प्रदर्शन किये गए और कई रैलियां भी निकाली गईं। फिर इसके बाद ब्रिटिश सरकार के द्वारा अमृतसर में मार्शल लॉ को लागू कर दिया और सभी सार्वजनिक सभाओं तथा रैलियों पर पाबन्दी लगा दी।

हंटर कमेटी

जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद हो रहे उग्र प्रदर्शनों से लाचार होकर ब्रिटिश सरकार के द्वारा जांच के लिए 1 अक्टूबर 1919 को लॉर्ड विलियम हंटर की मौजूदगी तथा उनकी अध्यक्षता मे एक कमेटी का गठन किया गया। इस हंटर समिति में लार्ड हंटर के अलावा और भी लोग मौजूद थे जैसे जस्टिस जीसी रैंकिन, डब्ल्यूएफ राइस, मेजर जनरल सर जॉर्ज बैरो और सर टॉम्स स्मिथ इसके सदस्य थे।

इस कमेटी में सर चिमन सीतलवाड़, सरदार सुल्तान अहमद खान और जगत नारायण को भी सम्मिलित किया गया था। हंटर कमेटी की रिपोर्ट आती, के उससे पहले ही ब्रिटिश सरकार ने अपने अधिकारियों को बचाने के लिए इंडेम्निटी बिल को पास करा दिया।

हंटर कमेटी की रिपोर्ट

मार्च 1920 में हंटर कमेटी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड पर अपनी रिपोर्ट को पेश करी। इस रिपोर्ट के अंदर इस हत्याकांड को हल्का दिखाने की पूरी कोशिश की गई। इस पूरी की पूरी रिपोर्ट में एक प्रकार की लीपापोती का प्रयास किया था। कमेटी की रिपोर्ट में पंजाब के गवर्नर माइकल ओ’डायर को निर्दोष ठहराया गया तथा शहीद उधम सिंह ने माइकल ओ’डायर को मारकर जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लिया। वहीं गोलीबारी को करवाने वाले जनरल डायर के बारे में यह कहा गया कि जनरल डायर ने जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग किया मगर जो किया वह निष्ठा से किया। जरनल डायर के इस अपराध के लिए उसे नौकरी से हटाने का दण्ड भी दिया गया। रिपोर्ट के अंदर मरने वालों की संख्या 379 तथा घायलों की संख्या कुछ सौ बतायी गयी थी।

जलियांवाला बाग का शहीदी कुआं

जलियांवाला बाग नरसंहार में अंधाधुन की गयी गोलीबारी में इतनी भयंकर भगदड़ मची कि निहत्थे लोग अपनी जान बचाने के लिए बाग में ही उपस्थित एक कुएं में कूद गए। कई सरे लोगों की तो इस कुए में कूदने से ही मृत्यु हो गई । दरअसल जलियांवाला बाग से बाहर निकलने के लिए एक संकरा मार्ग मौजूद था और चारों तरफ मकान थे। जब लोगों को भागने का कोई भी रास्ता नहीं मिला उनमे से कुछ लोग बाग में स्थित इस कुएं में कूदते गए और कुछ ही देर के अंदर यह कुआं लाशों से भरा गया।

जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक विधेयक, 2019 

जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक विधेयक के राज्यसभा से 19 नवंबर 2019 को पारित होने के पश्चात यह विधेयक संसद से पारित हो गया। केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बिल को पेश करते हुए यह कहा कि ”जलियांवाला बाग एक राष्ट्रीय स्मारक है तथा घटना के वर्ष 2019 में,100 साल पूरे होने के अवसर पर हम इस स्मारक को राजनीति से मुक्त करना चाहते हैं।’’

विधेयक में प्रमुख प्रावधान

  • इस विधेयक द्वारा जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक अधिनियम 1951 में संशोधन करा गया।
  • इस संशोधन बिल में जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक अधिनियम में कांग्रेस के अध्यक्ष को स्थायी सदस्य के तौर पर हटाने का प्रावधान है।
  • विधेयक यह भी स्पष्ट करता है कि जब लोकसभा में विपक्ष का कोई नेता नहीं होता है, तो केवल सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को ट्रस्टी बनाया जाएगा।
  • इस विधेयक के द्वारा केंद्र सरकार को यह अधिकार दिया है कि वह ट्रस्ट के किसी भी सदस्य को उसका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटा सकती है।
  • इस संशोधन के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष का न्यास के पदेन सदस्य होने का हक ख़त्म हो जायेगा। और उसके जगह पर लोकसभा में विपक्ष के नेता या फिर सबसे बड़े दल के नेता को सदस्य बनाया जायेगा।

जनरल डायर का पूरा नाम

रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर
उपनामद बुचर ऑफ़ अमृतसर (अमृतसर का कसाई) जनरल डायर
जन्म09 अक्टूबर मरी, पंजाब ( ब्रिटिश-भारत )
देहांत23 जुलाई 1927 (उम्र 62 वर्ष) लांग एश्टन, सॉमरसेट
निष्ठाग्रेट ब्रिटेन

जलियांवाला बाग हत्याकांड का परिणाम

जलियांवाला बाग के इस हत्याकांड में हजारों साधारण भारतीय लोगों की मृत्यु हुई थी। जनरल डायर की यह योजना थी की इस कुकर्म बाद भारतवासी दब जाएंगे तथा डर कर देश की आजादी की लड़ाई से हट जाएंगे। परन्तु इसका उल्टा हुआ जनरल डायर की यह धारणा गलत साबित हुई। जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद पुरे भारत देश में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आग सी भड़क उठी। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी भी इस खबर को सुनने के बाद सहन न कर पाए। भारत के हर क्षेत्र में आज़ादी की आग भड़क गई थी और हर जगह ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मोर्चे होने लगे थे। पूरा देश ब्रिटिश सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया था। लोगों के बीच बढ़ते असंतोष के कारण ब्रिटिश सरकार ने एक कमेटी को नियुक्त किया जिसका नाम था हंटर कमेटी। इस कमेटी ने भारत की जनता को पूर्ण रूप से धोखा दिया तथा रिपोर्ट को पूरी तरीके से अन्यायपूर्ण तरीके से पेश करा जिसमे कहा गया की जलियावाला बाग हत्याकांड में मात्र 400 लोगों की जान गयी थी। उनकी रिपोर्ट के अनुसार 10 अप्रैल से अमृतसर में मार्शल-लॉ लगा हुआ था जो की पूर्ण रूप से झूठ था क्योंकि अमृतसर तथा लाहौर में मार्शल लॉ 15 अप्रैल को घोषित किया गया था परन्तु ये घटना तो 13 अप्रैल को हई थी। कमेटी ने जनरल डायर के इतने क्रूर कृत्य करने पर भी उसे बचाने के लिए हर तरीके पेश किये।

जलियांवाला बाग कहाँ पर स्थित है?

भारत के पंजाब प्रान्त के अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग स्थित है।

जलियांवाला बाग हत्याकांड कब हुआ था हिंदी में?

पंजाब राज्य के अमृतसर में जलियांवाला बाग नाम की एक जगह है। 13 अप्रैल 1919 के दिन इसी जगह पर अंग्रेजों ने कई भारतीयों पर अंधाधुन गोलियां बरसाई थीं।

जलियांवाला बाग हत्याकांड क्यों हुआ था?

जलियाँवाला बाग अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर के निकट एक छोटा सा बगीचा है जहाँ पर 13 अप्रैल 1919 को ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने अंधाधुन गोलियां चला के निहत्थे, शान्त बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार दिया था और कई हजारों लोगों को घायल कर दिया था।

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