हरित क्रांति क्या है समझाइए | Harit Kranti kya hai Samjhaie

हरित क्रांति क्या है समझाइए | Harit Kranti kya hai Samjhaie

हरित क्रांति क्या है समझाइए | Harit Kranti kya hai Samjhaie

हरित क्रांति क्या है समझाइए | Harit Kranti kya hai Samjhaie – तो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में बात करेंगे हरित क्रांति के बारे में और जानने कि कोशिश करेंगे कि ये हरित क्रांति क्या होती है और इस हरित क्रांति के क्या लाभ है तथा इस हरित क्रांति के उद्देश्य क्या है , तो दोस्तों अगर आप भी इस हरित क्रांति के बारे में जानने की इच्छा रखते है , तो फिर बने रहे हमारे साथ इस आर्टिकल के अंत तक , ताकि आपके ज्ञान में और भी ज्यादा वृद्धि हो और आप कुछ नया ज्ञान प्राप्त कर सकें और अपने इस प्राप्त ज्ञान का सही जगह इस्तेमाल कर सकें। तो चलिए दोस्तों अब हम बात करेंगे हरित क्रांति के बारे में और जानने कि कोशिश करेंगे कि ये हरित क्रांति क्या होती है और इस हरित क्रांति के क्या लाभ है तथा इस हरित क्रांति के उद्देश्य क्या है :-

हरित क्रांति क्या है ?

हरित क्रांति को सन 1960 में नॉर्मन बोरलॉग के द्वारा शुरू किया गया एक प्रयास था। नॉर्मन बोरलॉग को हरित क्रांति का जनक ( Father of Green Revolution ) के रूप में भी जाना जाता है। इस हरित क्रांति को संचालित करने के बाद नॉर्मन बोरलॉग को उच्च उपज देने वाली फसलों की किस्मो को विकसित करने के कार्य को पूरा करने के लिए सन 1970 में नॉर्मन बोरलॉग को नॉबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा लेकिन भारत में हरित क्रांति का मुख्य रूप से नेतृत्व एम.एस.स्वामीनाथन के द्वारा किया गया था।

हरित क्रांति के परिणाम स्वरुप खाद्यान विशेष तौर पर गेंहू और चावल की फसल के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है , जिसकी शुरुआत 20वीं शताब्दी के माध्यम से विकासशील देश में नए और उच्च उपज देने वाले किस्म के बीजो के इस्तेमाल होने के कारण हुई है। इस हरित क्रांति की प्रारंभिक सफलता मेक्सिको और भारत जैसे उपमहाद्वीपों में देखी गई है। इस हरित क्रांति की मदद से भारत में होने वाली अनाज की को दूर कर दिया है और साथ ही सन 1967-1968 तथा सन 1977-1978 की अवधि में भारत को उस श्रेणी में से निकाल लिया गया है , जिसमे अनाज की कमी रहने वाले देशों को रखा जाता था और अग्रणी कृषि देशों की श्रेणी में परिवर्तित कर दिया गया है।

हरित क्रांति के लाभ

तो दोस्तों अगर आप भी अगर इस हरित क्रांति के लाभ के बारे में जानना चाहते हैं तो इसके लिए आपको नीचे दिए गए पॉइंट को पढ़ना होगा तो चलिए दोस्तों देखते हैं कि हरित क्रांति के लाभ क्या-क्या है :-

खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि :-

हरित क्रांति या नई कृषि राजनीति का पहला यह लाभ हुआ है कि कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है। जिससे विशेष रूप से गेहूं , बाजरा , चावल , मक्का , ज्वार , दलों आदि में उत्पादन अस्तित्व वृद्धि हुई है। इसके परिणाम स्वरूप भारत था अध्ययनों में आत्मनिर्भरता बढ़ गयी है। पहले से अब प्रति हेक्टेयर उत्पादन की स्थित में वृद्धि हुई है , देश में पहले सभी खाद्यान्नों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन सन 1950 से 51 में 522 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर था जो बढ़कर 2011 से 2012 में 1996 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गया है।

परंपरागत स्वरूप में परिवर्तन :-

हरित क्रांति द्वारा किसानों को परंपरागत खेती की सीमाएं पता चल गई है। आज किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार है और साथ ही आज खेती का व्यवसायीकरण हो चुका है लैजेस्की के अनुसार जहां कहीं भी नई तकनीकी उपलब्ध है कोई किसान उनके महत्व को अस्वीकार नहीं करता है और बेहतर कृषि विधियों तथा बेहतर जीवन स्तर की इच्छा में केवल नई उत्पादन तकनीक का प्रयोग करने वाले एक छोटे से धनी वर्ग तक सीमित नहीं है बल्कि उन लाखों किसानों में भी फैल गई है जिन्होंने अभी तक इस नई प्रणाली की नहीं अपनाया है या और जिनके लिए बेहतर जीवन स्तर अभी तक एक सपना है।

कृषि बचत में वृद्धि :-

खाद्यान्न में उत्पादन में वृद्धि का एक परिणाम यह हुआ कि मंडी में बिकने वाले खाद्यान्न की मात्रा में वृद्धि हो गई है , जिससे किसान के पास बचत की मात्रा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। जिसको देश के विकास के लिए काम में लाया जा रहा है यह वृद्धि विशेषकर औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए लाभकारी रही।

विश्वास :-

हरित क्रांति का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि किसान और सरकार व जनता सभी में यह विश्वास जागृत हो गया है कि भारत में कृषि उत्पादन के क्षेत्र में केवल आत्मनिर्भर ही नहीं हो सकता है बल्कि आवश्यकता पड़ने पर निर्यात भी सकता है।

ग्रामीण विकास :-

हरित क्रांति के फलस्वरूप सार्वजनिक एवं निर्माण कार्यों को प्रोत्साहन मिला है और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक की गतिविधियां बढ़ गई है।

हरित क्रांति के उद्देश्य

तो दोस्तों अगर आप भी अगर इस हरित क्रांति के उद्देश्य के बारे में जानना चाहते हैं तो इसके लिए आपको नीचे दिए गए पॉइंट को पढ़ना होगा तो चलिए दोस्तों देखते हैं कि हरित क्रांति के उद्देश्य क्या-क्या है :-

लघु अवधि के लिए :-

इस हरित क्रांति को पंचवर्षीय योजना के दौरान भारत में फैली भुखमरी की समस्या को दूर करने हेतु लघु अवधि के लिए यानि के काम और एक निश्चित समय के लिए लागू की गई थी।

दीर्घ अवधि के लिए :-

दीर्घ अवधि में ग्रामीण विकास के उद्देश्यों से लेकर के औद्योगिक विकास पर आधारित समग्र कृषि का आधुनिकीकरण तथा बुनियादी ढांचे का विकास और कच्चे माल की आपूर्ति आदि शामिल है।

वैज्ञानिक अध्ययन :-

इस हरित क्रांति का उद्देश्य है कि स्वास्थ्य पौधो का उत्पादन करना , जो अनुकूल जलवायु और रोगो का सामना करने में सक्षम हो।

रोजगार :-

इस हरित क्रांति का उद्देश्य देश के कृषि और औद्योगिक दोनों क्षेत्र के श्रमिकों को रोज़गार प्रदान करना।

कृषि का वैश्वीकरण :-

इस हरित क्रांति का मुख्य उद्देश्य गैर-औद्योगिक राष्ट्रों में प्रौद्योगिकी का प्रसार करना और प्रमुख कृषि क्षेत्रों में निगमों की स्थापना को प्रोत्साहित करना है।

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हरित क्रांति की शुरुआत कब हुई थी ?

हरित क्रांति को सन 1960 में नॉर्मन बोरलॉग के द्वारा शुरू किया गया एक प्रयास था। नॉर्मन बोरलॉग को हरित क्रांति का जनक ( Father of Green Revolution ) के रूप में भी जाना जाता है।

हरित क्रांति को भारत में किसने शुरू किया था ?

भारत में हरित क्रांति को शुरू मुख्य रूप से एम.एस.स्वामीनाथन के द्वारा किया गया था।

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