गठबंधन की राजनीति क्या है | Gathbandhan ki Rajniti kya hai

गठबंधन की राजनीति क्या है | Gathbandhan ki Rajniti kya hai

गठबंधन की राजनीति क्या है | Gathbandhan ki Rajniti kya hai

गठबंधन की राजनीति क्या है | Gathbandhan ki Rajniti kya hai – तो दोस्तों आज हम आपको इस में बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे जिसका शीर्षक राजनीती से संबंधित है। हाँ तो दोस्तों हम बात कर रहे है गठबंधन की राजनीती के बारे में और जानने की कोशिश कर रहे है कि ये गठबंधन की राजनीति आखिर में होती क्या है और इस गठबंधन की राजनीति का उदय कब और कहाँ से और कैसे हुआ तथा इस गठबंधन की राजनीति का इतिहास क्या है। इन सब के बारे में हम आज विस्तार से बात करेंगे तो दोस्तों ऐसी ही और भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए बने रहे हमारे साथ इस आर्टिकल के अंत तक :- गठबंधन की राजनीति क्या है | Gathbandhan ki Rajniti kya hai | गठबंधन की राजनीति क्या है | Gathbandhan ki Rajniti kya hai

गठबंधन की राजनीति क्या है | Gathbandhan ki Rajniti kya hai?

तो दोस्तों गठबंधन सरकार से आशा है कि एक ऐसी सरकार जो भी नेताओं से मिलकर बनाई जाती है जिनमें कई दल के नेता शामिल होते हैं। क्यों कि किसी विशेष दल को बहुमत ना मिलने की स्थिति में सरकार बनाने का यही एकमात्र उपाय बाकी रहता है। तो दोस्तों जैसा कि कई बार ऐसी स्थिती देखने को मिलती है जिसमें प्रतिनिधि सदन में किसी दल को स्पष्टता के ना मिलने पर बिना बहुमत के सरकार चलाना बहुत ही मुश्किल होता है। तो ऐसे में कुछ दल मिलकर के अपना एक गठबंधन बना लेते और आपस में विचार-विमर्श कर साझा कार्यक्रम तय कर लेते हैं।

क्योंकि अलग-अलग दलों के सिद्धांत और विचार भी अलग–अलग होते है। तो ऐसे में दोस्तों गठबंधन की राजनीति में शामिल दल सबकी विचारधारा में स्वीकार्य ऐसे कार्यक्रम तय कर लेते हैं ताकि गठबंधन में शामिल दलों का आपस में कोई विरोध ना हो। क्यो कि विरोध में भी कुछ दल मिलकर गठबंधन का निर्माण कर लेते हैं कई दलों द्वारा न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर जो गठबंधन का निर्माण किया जाता है उसका आधार को मिलाकर राजनीति गतिविधियों का संचालन करते है। उसी को वर्तमान में गठबंधन की राजनीति कहा जाता है।

गठबंधन की राजनीति क्या है | Gathbandhan ki Rajniti kya hai | गठबंधन की राजनीति क्या है | Gathbandhan ki Rajniti kya hai | गठबंधन की राजनीति क्या है | Gathbandhan ki Rajniti kya hai

गठबंधन की राजनीति का उदय | Gathbandhan ki Rajniti ka Uday

कांग्रेस को शुरू के तीन आम चुनाव के वर्चस्व वाले चुनाव में भारत की स्वतंत्रा आंदोलन एवं पुराने संगठनात्मक ढांचे के कारण न केवल केंद्र में बल्कि प्रांतों में भी उसको बहुत ज्यादा बहुमत मिला था। लेकिन चौथे आम चुनाव में कांग्रेस को कई राज्यों में बहुमत से हाथ धोना पड़ा था। हालांकि कम बहुमत से ही केंद्र में कांग्रेस की सरकार बन गई थी।

राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश की विधानसभा में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और वह केवल एक बड़ा दल बंद कर रह गया था और केरल उड़ीसा हम तमिलनाडु में भी उसे बहुत कम सीट मिली थी जिस वजह से चौथे आम चुनाव के इन परिवार परिणामों ने गठबंधन की राजनीति की शुरुआत की और कई राज्यों में 1 से अधिक राजनीतिक दलों ने मिलकर सरकार बनाई कुछ राज्यों में एक-दूसरे के बिल्कुल विरोधी विचारधारा वाले राजनीतिक दलों ने भी मिलकर एक सरकार बनाई थी।

गठबंधन की राजनीति का इतिहास क्या है | Gathbandhan ki Rajniti ka Itihas kya hai?

सन 1977 के आम चुनाव में पहली बार केंद्र में कांग्रेस की हार हुई थी क्योंकि उसे लोकसभा में बहुमत प्राप्त नहीं हुआ था। फिर पांच दलों ने मिलकर जनता पार्टी को बहुमत प्रदान किया था तथा मोररजी देसाई के नेतृत्व में सरकार बनाई गई थी तथा कहने के लिए तो वो प्रधानमंत्री मोररजी देसाई की सरकार जनता पार्टी की सरकार थी लेकिन उसमें शामिल दल एक पार्टी जैसा व्यवहार नहीं कर सके और जनता पार्टी की सरकार गठबंधन सरकार की तरह ही व्यवहार करने लगी।

इंडियन एक्सप्रेस में 21 अप्रैल 1980 में केंद्र में जनता पार्टी की सरकार की स्थिति एक मिली जुली सरकार जैसी रही और सत्ता में भागीदारी सभी दलों ने इस बात के लिए एक साल में ही जनता पार्टी का समर्थन वापस ले लिया और अल्पकाल में जनता पार्टी दोहरी सदस्यता के मुद्दे पर वापस बिखर गई। उसके बाद चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस से समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद सरकार लोकसभा का भी सामना नहीं कर सकी और नयें चुनाव कराने पड़े।

यह भी पढ़े :-

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *