Eid E Zehra Kya Hai | ईद ए ज़ेहरा क्या हैं ?

Eid E Zehra Kya Hai | ईद ए ज़ेहरा क्या हैं ?

Eid E Zehra Kya Hai | ईद ए ज़ेहरा क्या हैं ?

इस आर्टिकल में हम आपको Eid E Zehra Kya Hai | ईद ए ज़ेहरा क्या हैं ? के बारे में बताएँगे आज बहुत से लोग यह सोच रहे होंगे के ईद ए ज़ेहरा क्या हैं और इसे इस नाम से क्यों जाना जाता हैं और यह ईद पैगम्बर मुहम्मद के समय तो नहीं थी लेकिन इसे बाद में क्यों शुरू करा गया। तो इस लेख को अंत तक ज़रूर पढ़े।

Eid Eid E Zehra Kyo Banayi Jati Hain.

दोस्तों ईद ए ज़ेहरा की अलग अलग तारीखे हैं और इसमें अलग अलग बाते कही जाती हैं कोई कहता हैं के ईद ए ज़ेहरा को हज़रत मुहम्मद साहब और उनकी बीवी खदीजा की शादी की पहली सालगिरा को कहते हैं , और कोई कहता हैं के इस दिन इमाम मेहदी को इमामत मिली थी और कोई कहता हैं के कर्बला के शहीदों का बदला लेने पर जो ख़ुशी अहलेबैत यानि पैगम्बर मुहम्मद के परिवार वालो को ख़ुशी थी। लेकिन इसमें एक मशहूर यही हैं जो हम आपको बताएँगे। Eid E Zehra Kya Hai | ईद ए ज़ेहरा क्या हैं ?

इस्लाम के अंदर कई अलग अलग गिरोह बन गए जिसमे से एक गिरोह शिआ हैं जो अपने मातम के लिए जाना चाहता हैं , इस्लाम में एक महीना मुहर्रम होता हैं जिसे पैगम्बर मुहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की शहादत के गम में सोग मनाया जाता हैं इमाम हुसैन बहादुरी की एक मिसाल हैं जिन्हे उनके 72 साथियो के साथ कर्बला में शहीद कर दिया गया था जिसमे इमाम हुसैन का कुछ महीने का दूध पिता बच्चा भी शहीद हो गया था , और दुश्मनो ने उस बच्चे के ऊपर भी कोई रेहम दिली नहीं दिखाई थी। Eid E Zehra Kya Hai | ईद ए ज़ेहरा क्या हैं ?

कर्बला का वाक़िया बहादुरी की एक बहुत बढ़ी मिसाल हैं जिसमे इमाम हुसैन ने अपना सर सजदे की हालत में कटवा दिया था लेकिन ज़ालिम के सामने सर नहीं झुकाया था और , सच्चाई पर हमेशा जमे रहे थे और यज़ीद जैसे बुरे आदमी की बात कभी नहीं मानी। और अपने पुरे घर वालो को सच्चाई की राह पर क़ुर्बान कर दिया।

तो जब इमाम हुसैन को धोके से कर्बला बुलैया गया था और उन्हें वह शहीद करवा दिया गया था तो पुरे घर के अंदर शोक का माहौल था क्योकि उनके परिवार के सभी लोग उस जुंग में शहीद हो गए थे और कुछ ही लोग बचे थे यहाँ तक के दुश्मनो ने इमाम हुसैन के छोटे से बच्चे को भी नहीं छोड़ा था। Eid E Zehra Kya Hai | ईद ए ज़ेहरा क्या हैं ?

और ऐसा कहा जाता हैं के जो कूफ़ा के लोग थे उन्हें धोके सेयज़ीद के सिपाहियों ने कैद कर दिया था और उन्हें तब तक नहीं छोड़ा जब तक कर्बला की जुंग नहीं हो गयी और उनपर बहुत ज़ुल्म करे और बहुत परेशान करा। लेकिन जब उन लोगो ने सुना के यज़ीद की फ़ौज ने इमाम हुसैन को शहीद कर दिया तोँ लोगो ने बगावत शुरू कर दी, और यज़ीद की बैत तोड़ दी उसमे एक शख्स था मुख़्तार ए सखवी। मुख़्तार ए सखवी को अहले बैत से प्यार था और वही इमाम हुसेन को कूफ़ा बुलवा रहे थे। Eid E Zehra Kya Hai | ईद ए ज़ेहरा क्या हैं ?

क्योकि वह यज़ीद के ज़ुल्म से बहुत परेशान हो गए थे और वह चाहते थे के पैगम्बर मुहम्मद के घर के लोग उनकी खिलाफत ले ले और इन्हे इस से बचा ले लेकिन यज़ीद की फ़ौज को जब पता चला तो उन्होंने इमाम हुसैन को रस्ते में रोक लिया और शहीद कर दिया।

Imam Hussain Ke Qatal ka Badla Kisne Liya

तब मुख्तार इबन उबेदुल्लाह और इब्राहिम इब्न मलिक अल– अश्तर और अन्य लोगों के साथ इमाम हुसैन के खून का बदला लेने के लिए उठे उन्होंने कर्बला के हत्यारे को गिरफ्तार कर उन्हें फांसी पर लटका दिया । अंत में मुख्तार ने उमर इब्न साद इब्न अबी वक्वास ( करबले में यजीद की सेना के कमांडर इन चीफ) और उबेदुल्लाह इब्न जियाद ( कूफा में यजीद के गवर्नर) को गिरफ्तार कर लिया । उसने उनका सिर कलम कर दिया और सिर मदीना में इमाम अल हुसैन अल जैनुल आबेदीन के पास भेजे । तब इमाम अल हुसैन अल जैनुल आबेदीन ने अल्लाह का शुक्र अदा करा सजदा करा और कहा के में अल्लाह का शुक्र अदा करता हु जिसने मेरे वालिद के कातिलों की मौत तक मुझे जिंदा रखा । और अपना गम भूल कर खुश हो गए ।

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