धारा 370 क्या है हिंदी में निबंध | Dhara 370 kya hai in Hindi

धारा 370 क्या है हिंदी में निबंध | Dhara 370 kya hai in Hindi

धारा 370 क्या है हिंदी में निबंध | Dhara 370 kya hai in Hindi

धारा 370 क्या है हिंदी में निबंध | Dhara 370 kya hai in Hindi – तो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में बात करेंगे धारा 370 के बारे में और जानने की कोशिश करेंगे कि ये धारा 370 है क्या और इस धारा 370 के तहत किस राज्य में कौन से कानून लागू थे तथा क्या ये धारा 370 हमेशा के लिए है। तो दोस्तों अगर आप भी इस धारा 370 के बारे में जानने की इच्छा रखते है तो फिर बने रहे हमारे साथ इस आर्टिकल के अंत तक ताकि आपके ज्ञान में और भी ज्यादा वृद्धि हो और आप कुछ नया ज्ञान प्राप्त कर सकें। तो चलिए दोस्तों अब हम बात करेंगे धारा 370 के बारे में और जानने की कोशिश करेंगे कि ये धारा 370 है क्या और इस धारा 370 के तहत किस राज्य में कौन से कानून लागू थे तथा क्या ये धारा 370 हमेशा के लिए है :-

धारा 370 क्या है हिंदी में निबंध | Dhara 370 kya hai in Hindi
धारा 370 क्या है हिंदी में निबंध | Dhara 370 kya hai in Hindi

धारा 370 क्या है | Dhara 370 kya hai?

26 अक्टूबर 1947 में जम्मू और कश्मीर के तत्कालीन शासक राजा हरिसिंह ने भारत में विलय के लिए एक विलय-पत्र पर दस्तखत किए थे जिसको ब्रिटिश गवर्नर जनरल माउंटबेटन ने 27 अक्टूबर को मंजूरी दी थी। जब राजा हरिसिंह ने भारत में विलय होने के लिए विलय-पत्र पर दस्तखत किए थे, जब जम्मू-कश्मीर की स्थिति सही नहीं थी। उस समय जम्मू-कश्मीर में अफरा-तफरी का माहौल बन चुका था। लेकिन उसके बाद भी जम्मू-कश्मीर भारत में विलय हो गया था और उस जम्मू कश्मीर में धारा 370 लागू की गई थी। ये धारा 370 भारतीय संविधान से जम्मू-कश्मीर को आज़ाद रखती थी ( यानी के जम्मू-कश्मीर भारत का कानून लागू नहीं था। जम्मू-कश्मीर खुद का अपना कानून बनाने में सक्षम था। )। हम आपको ये बताते चलें कि ये धारा 370 जम्मू-कश्मीर में अस्थाई तौर पर लागू की गई थी।

धारा 370 के तहत जम्मू-कश्मीर में क्या कानून थे?

धारा 370 के तहत जम्मू-कश्मीर में निम्न लिखित कानून थे :-

  1. धारा 370 के तहत जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता (भारत और कश्मीर) होती है।
  2. धारा 370 के विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती है।
  3. धारा 370 के कारण ही राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्‍त करने का अधिकार नहीं है।
  4. धारा 370 के तहत भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में केवल अत्यन्त सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है।
  5. धारा 370 के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग है. वहां के नागरिकों द्वारा भारत के राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना अनिवार्य नहीं है।
  6. धारा 370 के तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि खरीदने का अधिकार है। (यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते)
  7. धारा 370 के अंतर्गत कश्मीर में पंचायत को अधिकार प्राप्त नहीं था।
  8. धारा 370 के कारण ही कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती थी।
  9. धारा 370 के तहत कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू था।
  10. जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
  11. धारा 370 के तहत कश्मीर में आरटीआई और सीएजी (CAG) जैसे कानून लागू नहीं होते हैं।
  12. भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता है।
  13. धारा 370 के अंतर्गत भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं।
  14. धारा 370 के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर की कोई महिला अगर भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर है, तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाएगी। इसके विपरीत अगर वह पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाएगी।

Note :- तो दोस्तों अगर आप ऊपर दिए गए कानून के बारे में और विस्तार से जानना चाहते हो तो, फिर आप इस दी गई लिंक click here पर क्लिक करें !

धारा 370 लागू करने की प्रक्रिया क्या थी?

मसौदा मूल रूप से जम्मू-कश्मीर की सरकार के लिए तैयार किया गया था। संशोधन और बातचीत के बाद, अनुच्छेद 306A (अब 370) को संविधान सभा द्वारा 27 मई 1949 को अनुमोदित किया गया था। प्रस्ताव अय्यंगार द्वारा पेश किया गया था और घोषित किया कि, भले ही परिग्रहण पूरा हो गया था, भारत ने एक जनमत संग्रह लेने की पेशकश की थी जब शर्तें बनाई गई थीं और इस घटना में कि परिग्रहण की पुष्टि नहीं की गई थी, तो “हमें भारत को कश्मीर से खुद को अलग करने के रास्ते में नहीं होना चाहिए”

17 अक्टूबर 1949 को, जिस दिन भारत की संविधान सभा द्वारा अनुच्छेद 370 को अंततः संविधान में शामिल किया गया था, अय्यंगार ने जनमत संग्रह के लिए भारत के समर्थन और जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा के लिए एक अलग संविधान बनाने की बात को दोहराया था।

क्या धारा 370 को हटाया जा सकता है?

हां, अनुच्छेद 370(3) राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति के आदेश में एक प्रावधान को हटाने की अनुमति देता है। हालांकि, इस तरह के आदेश के लिए जम्मू-कश्मीर संविधान सभा की मंजूरी होनी चाहिए। चूंकि 26 जनवरी, 1957 को संविधान सभा को भंग कर दिया गया था, इसलिए एक व्याख्या यह है कि इसे अब और समाप्त नहीं किया जा सकता है। हालाँकि, वैकल्पिक दृष्टिकोण यह है कि इसे पूरा किया जा सकता है लेकिन केवल राज्य विधानसभा के अनुमोदन से ही इस धारा 370 को हटाया जा सकता है।

क्या धारा 370 एक अस्थायी प्रावधान था?

यह संविधान के XXI के भाग में लेखों में से पहला है। इस खंड का शीर्षक ‘अस्थायी संक्रमणकालीन और विशिष्ट प्रावधान’ है। अनुच्छेद 370 को एक अस्थायी प्रावधान के रूप में पढ़ा जा सकता है क्योंकि जम्मू-कश्मीर संविधान सभा के पास इसे बदलने, हटाने या बनाए रखने का विकल्प था। लेकिन उस समय की सभा ने इसे रखने का निर्णय लिया। एक और व्याख्या यह थी कि एक जनमत संग्रह के समय तक परिग्रहण केवल अस्थायी था। केंद्र सरकार ने 2013 में संसद को एक लिखित जवाब में कहा कि अनुच्छेद 370 को खत्म करने की कोई योजना नहीं थी। कुमारी विजयलक्ष्मी (2017) में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि अनुच्छेद 370 अस्थायी है और इसका निरंतर अस्तित्व एक देशद्रोही है। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2018 में यह घोषित किया था कि “अस्थायी अनुच्छेद 370 शब्द का उपयोग करने वाले हेडनोट अस्थायी नहीं है। संपत प्रकाश (1969) के मामले में, SC ने अस्थायी प्रावधान के रूप में अनुच्छेद 370 की धारणा को खारिज कर दिया। एक पांच- जज बेंच ने कहा, “अनुच्छेद 370 हमेशा अपने संचालन में जारी रहा है।” यह इसे अनिश्चितकालीन प्रावधान बनाता है।

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