चिपको आंदोलन क्या हैं | Chipko Andolan Kya hain Likhiye Samjhaiye In Hindi Mein

चिपको आंदोलन क्या हैं | Chipko Andolan Kya hain Likhiye Samjhaiye In Hindi Mein

चिपको आंदोलन क्या हैं ? Chipko Andolan Kya hain Likhiye Samjhaiye In Hindi Mein

इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे के चिपको आंदोलन क्या हैं | Chipko Andolan Kya hain Likhiye Samjhaiye In Hindi Mein ,और उसके बारे में पूरी जानकारी देंगे चपको आंदोलन की शुरुवात उत्तराखंड (उस समय उत्तर प्रदेश )से हुई थी यह आंदोलन वनो की कटाई के लिए करा गया था जिसमे महिलाओ और पुरुषो ने जमकर हस्सा लिया था और अपनी जान तक दो पर लगा दी थी वनो को बचने के लिए। चिपको आंदोलन में लोग वैन विभाग के ठेकेदारों का वृक्षों की कटाई के लिए विरोध कर रहे थे ,

चिपको आंदोलन क्या हैं | Chipko Andolan Kya hain Likhiye Samjhaiye In Hindi Mein
चिपको आंदोलन क्या हैं | Chipko Andolan Kya hain Likhiye Samjhaiye In Hindi Mein

चिपको आंदोलन क्या हैं ?

इसका नाम चिपको आद्नोलन इसलिए पढ़ा क्योकि जब कोई ठेकेदार या कोई वैन विभाग का अफसर वृक्षों को काटने के लिए आता था तो जो पुरुष महिले थे वह वृक्षों को बचने के लिए खुद को पेड़ से चिपका लेते थे और तब तक नहीं हैट ते थे जब ता वह अफसर वह से चला नहीं जाता और ऐसा हर जगह होने लगा।

चपको आंदोलन की शुरुआत चमोली जिले में सन 1973 में शुरू हुई थी और धीरे धीरे यह पुरे देश में चलने लगी थी इसकी शुरआत गोपेश्वर नाम के एक स्थान से शुरू हुई थी और इसकी ख़ास बात यह थी के इसके अंदर स्त्रियों ने खूब हिस्सा लिया था , इस आंदोलन की शुरुआत 1972 में प्रसिद्ध पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा , कामरेड गोविन्द सिंह रावत , चण्डीप्रसाद भट्ट तथा श्रीमती गौरादेवी के नेत्रत्व में हुई थी। और इस दौरान कई नारे भी मशहूर हुए

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चिपको आंदोलन में दिया गया नारा

कामरेड गोविन्द सिंह रावत ने झपटा- छीनो आंदोलन को दिशा दी थी , चिपको आन्दोलन वनों का अबे भाग कटाने रोकने और गान पर आश्रित लोगों के वनाअधिकारियों की रक्षा का आंदोलन था रेणी में 2400 से अधिक पेड़ो कोलकाता जाना था इसलिए इस पर वन विभाग व ठेकेदार जान लगाने को तैयार बैठे थे जिससे गोरा देवी जी के नेतृत्व में रेणी गांव की 27 महिलाओं ने प्राणों की बाजी लगाकर असफल कर दिया था ।

आंदोलन का प्रभाव

चिपको आंदोलन के मुख्य उपलब्धि यह रही किसने केंद्रीय राजनीति के एजेंडे में पर्यावरण को एक संघन मुद्दा बना दिया था चिपको आंदोलन के साथी एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ शेखर पाठक के अनुसार भारत में 1980 का वन संरक्षण अधिनियम और यहां तक कि केंद्र सरकार में पर्यावरण मंत्रालय का गठन की वजह से ही संभव हो पाया था

चिपको आंदोलन की वजह से साल 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने एक विधेयक बनाया था इस विधेयक में हिमालयी क्षेत्रों के वनों को काटने पर 15 सालों का प्रतिबंध लगा दिया था चिपको आंदोलन ना सिर्फ उत्तराखंड में बल्कि पूरे देश में फैल गया था और उसका असर दिखने लगा था ।

उत्तराखंड में 1980 बाद के वर्षों में यह आंदोलन पूर्व में बिहार पश्चिम में राजस्थान उत्तर में हिमाचल प्रदेश दक्षिण में कर्नाटक और मध्य भारत में विंध्य तक फैल गया था उत्तर प्रदेश में प्रतिबंध के अलावा यह आंदोलन पश्चिम घाट और विंध्य पर्वतमाला में वृक्षों की कटाई को रोकने में सफल रहा ।

चिपको आंदोलन की शुरआत किसने करी थी ?

चिपको आंदोलन की शुरआत चंडी प्रसाद भट्ट जी ने करी थी करी थी ।

चिपको आंदोलन कब शुरू हुआ था?

चिपको आंदोलन एक खेल के समान बनाने वाली कम्पनी को वन की भूमि देने पर सरकार के फैसले पर शुरू हुआ था , सरकार के इस कदम से नाराज़ ग्रामीणों ने पेड़ो को काटने से रोकने के लिए पेड़ो के चारो ओर घेरा बना लिया था और बाद में जब कोई पेड़ काटने आता तो लोग पेड़ो से चिपकने लग गए इसलिए इसका नाम चिपको आंदोलन पढ़ा ।

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