26 जनवरी क्यों मनाया जाता है | 26 January kyu manaya Jata hai in Hindi

26 जनवरी क्यों मनाया जाता है | 26 January kyu manaya Jata hai in Hindi

26 जनवरी क्यों मनाया जाता है | 26 January kyu manaya Jata hai in Hindi

26 जनवरी क्यों मनाया जाता है | 26 January kyu manaya Jata hai in Hindi – तो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में बात करेंगे 26 जनवरी के बारे में और जानने की कोशिश करेंगे कि इस 26 जनवरी को क्यों मनाया जाता है तो दोस्तों अगर आप भी इस 26 जनवरी वाले टॉपिक के बारे में जानने की इच्छा रखते है , तो फिर बने रहे हमारे साथ इस आर्टिकल के अंत तक , ताकि आपके ज्ञान में और भी ज्यादा वृद्धि हो और आप कुछ नया सीख सकें। तो चलिए दोस्तों अब हम बात करने वाले है 26 जनवरी के बारे में और जानने की कोशिश करेंगे कि 26 जनवरी को क्यों मनाया जाता है :-

26 जनवरी क्यों मनाया जाता है ?

26 जनवरी को देश के राष्ट्रीय पर्वों में शामिल किया गया है। इस दिन देश के प्रत्येक नागरिक स्वतंत्रता सेनानियों और वीर योद्धाओं को याद करते है। इस दिन हर साल 26 जनवरी को भारत देश के माननीय राष्ट्रपति देश का झंडा यानि के तिरंगा लहराते है और साथ ही गर्व और ख़ुशी के साथ 21 तोपों की सलामी दी जाती है। 26 जनवरी को देश में राष्ट्रीय अवकाश रहता है हालांकि कई स्कूलों और संस्थानों में इस दिन रंगारंग कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। क्यों कि जिस संविधान के अनुसार हमारे देश में जितने भी काम हो रहे है , उस संविधान को 26 जनवरी 1950 में हमारे देश में लागू किया गया था। पहले से मौजूद ब्रिटिश कानून भारत सरकार अधिनियम (1935) को भारतीय संविधान के माध्यम से भारतीय शासन के दस्तावेज के रूप में बदल दिया गया था। इसलिए पुरे भारत देश के नागरिक इस 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस को एक त्योहार के रूप में हर साल मनाते है।

26 जनवरी को क्या हुआ था ?

हमारा भारत देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था , लेकिन इसकी आजादी की घोषणा 7 से 8 महीने पहले ही कर दी गई थी और पहले से ही देश का नया संविधान ( कानून ) लिखने का काम शुरू कर दिया गया था। ब्रिटिश काल के समय में जो हमारे भारत देश का संविधान था उसी संविधान के अनुसार बनाकर के पूरा नया संविधान किया गया था।

हमारे देश के संविधान को बनाने में करीब 2 साल 11 महीने 18 दिन लगे थे यानि के लगभग पूरे 3 साल लगे थे संविधान को बनाने में लेकिन जब संविधान को लागू किया गया तब लोगो को इस संविधान के बारे में टुकड़ो-टुकड़ो में बताया गया था। ऐसे ही लोगो को धीरे-धीरे संविधान के बारे में जानकारी दी गयी और फिर संविधान को 26 जनवरी 1950 में सम्पूर्ण तरीके से लागू कर दिया गया था।

यानि के आज़ादी के करीब 3 साल बाद मतलब के सन 1947 से बनना शुरू हुआ और 1950 में संविधान बन कर तैयार हुआ और उसी समय यानि के 26 जनवरी 1950 में भारत देश में सम्पूर्ण तरीके से संविधान को लागू कर दिया गया था। लेकिन जब 26 जनवरी 1950 में संविधान को लागू किया गया था तब उसके साथ ही हमारे देश भारत में लोकतंत्र के नए सेलेब्स भी बन गए थे।

भारत का संविधान किसने बनाया था ?

जैसा कि हम बात कर रहे है भारत के संविधान के बारे में कि ये संविधान किसने बनाया था , तो दोस्तों आपको ये जानकर के हैरानी होगी के जिस संविधान के अनुसार हमारे देश में जितने भी काम हो रहे है , उस संविधान को बनाने के लिए 308 सदस्यों की समितियों ने मिलकर के काम किया था। लेकिन इस संविधान का प्रारूप भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने तैयार किया था। जिन्हे भारत देश की 80 % जनता भारतीय संविधान के निर्माता के रूप में जानती है। कई सुधारों और परिवर्तनों के बाद, समिति के 308 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को हस्तलिखित कानून की दो प्रतियों पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद इसे दो दिन बाद 26 जनवरी को देश में लागू किया गया। 26 जनवरी के महत्व को बनाए रखने के लिए उसी दिन भारत को एक लोकतांत्रिक पहचान दी गई थी।

26 जनवरी क्यों मनाया जाता है | 26 January kyu manaya Jata hai in Hindi
26 जनवरी क्यों मनाया जाता है | 26 January kyu manaya Jata hai in Hindi

26 जनवरी को ही क्यों भारत का संविधान लागू किया गया ?

26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा द्वारा संविधान को अपनाने के बाद 26 जनवरी 1950 में देश के अंदर सम्पूर्ण तरीके से लागू कर दिया गया था। संविधान को लागू करने के लिए तारीख 26 जनवरी इस लिए चुनी गई थी क्यों कि ये तारीख पूर्ण स्वराज दिवस से मेल खाती थी। क्यों कि इसी तारीख को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध करने के लिए पूर्ण स्वराज का ऐलान करा था और इस पूर्ण स्वराज की घोषणा लाहौर में कांग्रेस के ऐतिहासिक वार्षिक अधिवेशन में की गई थी।

जवाहरलाल नेहरू को उनके पिता मोतीलाल नेहरू से पदभार संभालने के लिए कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जिन्होंने भारत के लिए एक नए डोमिनियन स्टेटस संविधान का समर्थन किया था। 40 वर्षीय जवाहरलाल ने अपने पिता के प्रस्ताव को खारिज कर दिया और ब्रिटिश शासन से पूरी तरह अलग होने का तर्क दिया। उन्हें बाल गंगाधर तिलक, सुभाष चंद्र बोस, अरबिंदो और बिपिन चंद्र पाल जैसे नेताओं का समर्थन प्राप्त था।

जब प्रस्ताव पारित किया गया और कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध करने के लिए पूर्ण स्वराज का ऐलान करा था तब जनवरी 1930 का अंतिम रविवार निर्धारित किया गया था और उसी अंतिम रविवार को 26 तारीख थी यानि के कांग्रेस ने भारतीय नागरिकों से 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का आग्रह किया। अगस्त 1947 में वास्तविक स्वतंत्रता के बाद, 26 जनवरी की महत्वपूर्ण तारीख को छोड़ा नहीं जा सकता था। इसलिए बाद वाले को इसे समान रूप से महत्वपूर्ण दिन के रूप में चिह्नित करने के लिए चुना गया था।

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26 जनवरी के दिन क्या हुआ था ?

हमारा भारत देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था , लेकिन इसकी आजादी की घोषणा 7 से 8 महीने पहले ही कर दी गई थी और पहले से ही देश का नया संविधान ( कानून ) लिखने का काम शुरू कर दिया गया था। ब्रिटिश काल के समय में जो हमारे भारत देश का संविधान था उसी संविधान के अनुसार बनाकर के पूरा नया संविधान किया गया था।

हमारे देश के संविधान को बनाने में करीब 2 साल 11 महीने 18 दिन लगे थे यानि के लगभग पूरे 3 साल लगे थे संविधान को बनाने में लेकिन जब संविधान को लागू किया गया तब लोगो को इस संविधान के बारे में टुकड़ो-टुकड़ो में बताया गया था। ऐसे ही लोगो को धीरे-धीरे संविधान के बारे में जानकारी दी गयी और फिर संविधान को 26 जनवरी 1950 में सम्पूर्ण तरीके से लागू कर दिया गया था।

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है ? ये हैं असल वजह

26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा द्वारा संविधान को अपनाने के बाद 26 जनवरी 1950 में देश के अंदर सम्पूर्ण तरीके से लागू कर दिया गया था। संविधान को लागू करने के लिए तारीख 26 जनवरी इस लिए चुनी गई थी क्यों कि ये तारीख पूर्ण स्वराज दिवस से मेल खाती थी। क्यों कि इसी तारीख को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध करने के लिए पूर्ण स्वराज का ऐलान करा था और इस पूर्ण स्वराज की घोषणा लाहौर में कांग्रेस के ऐतिहासिक वार्षिक अधिवेशन में की गई थी।

जब प्रस्ताव पारित किया गया और कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध करने के लिए पूर्ण स्वराज का ऐलान करा था तब जनवरी 1930 का अंतिम रविवार निर्धारित किया गया था और उसी अंतिम रविवार को 26 तारीख थी यानि के कांग्रेस ने भारतीय नागरिकों से 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का आग्रह किया। अगस्त 1947 में वास्तविक स्वतंत्रता के बाद, 26 जनवरी की महत्वपूर्ण तारीख को छोड़ा नहीं जा सकता था। इसलिए बाद वाले को इसे समान रूप से महत्वपूर्ण दिन के रूप में चिह्नित करने के लिए चुना गया था।

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